उन्हें ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने छोटा ट्रैक्टर बनाया है। यह काफी कम त्रिज्या के साथ घूम सकता है। इस ट्रैक्टर के लिए कंपनी को बांग्लादेश तथा तीसरी दुनिया के अन्य देशों से भी ऑर्डर मिले हैं, जहां आम तौर पर किसानों के पास छोटे-छोटे खेत हैं। सीएमईआरआई के वैज्ञानिकों ने बताया कि कंपनी को पूंजी उपलब्ध कराने के लिए नाबार्ड तथा कुछ निजी एजेंसियों से बात चल रही है तथा उम्मीद है कि फरवरी 2017 तक यह ट्रैक्टर बाजार में दस्तक दे देगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए असेम्बली लाइन भी तैयार हो चुकी है। कीमत के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अंतिम कीमत कंपनी को तय करनी है, लेकिन दाम दो लाख रुपए के अंदर ही रहने की संभावना है। उन्होंने बताया कि ट्रैक्टर के इंजन तथा इसके मूल डिजाइन से छेड़छाड़ किए बिना इसके बाहरी डिजाइन में कुछ बदलाव भी किए गए हैं।