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160 देशों को ऑफ-हाईवे टायर बेचती है ये भारतीय कंपनी, 2,700 से भी ज्यादा टायर्स की वैराइटी है मौजूद

भिवाड़ी और चोपांकी में स्थित है मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री ऑफ-हाईवे के अलावा कंपनी 100cc बाइक्स के लिए टायर भी बनाती है

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नई दिल्ली: ऑफ-रोड टायर बनाने वाली भारतीय कंपनी बालकृष्ण इंडस्ट्रीज लिमिटेड ( BKT ) 'मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ पर केंद्रित है और इसका मतलब है स्वदेशी उत्पादों और सेवाओं के निर्यात पर जोर। साथ ही कंपनी का घरेलू निर्मित उत्पादों से विदेशी उत्पादों को प्रतिस्थापित करने पर भी समान जोर है।

इस प्रतिकूल स्थिति से उबरने के लिए और इस तरह के टायरों की उपलब्धता के लिए घरेलू आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए भारत की प्रमुख ऑफ-हाइवे टायर कंपनी बीकेटी अपनी सेवा देने में जुटी है। राजस्थान में अपनी जुड़वा विनिर्माण सुविधाएं (2002 में भिवाड़ी में और 2006 में चोपांकी) स्थापित करने के बाद बीकेटी निरंतर आधुनिकीकरण के लिए इन संयंत्रों में निवेश कर रही है और साथ ही क्षमता विस्तार भी किया जा रहा है। भिवाड़ी और चोपांकी, स्थापना के समय से आईएसओ 9000 और 14000 से प्रमाणित है। जबकि भिवाड़ी संयंत्र अधिग्रहित है और चोपांकी संयंत्र 100 फीसदी ग्रीनफील्ड परियोजना है, दोनों संयंत्र एमईएस अनुपालन से सुसज्जित हैं।

भारत में स्किलिंग और रोजगार के लिए बीकेटी ने भिवाड़ी और चोपांकी में अधिक ध्यान दिया है। इन दोनों संयंत्रों में 3200 से अधिक कर्मचारियों के साथ, बीकेटी के आत्मनिर्भर भारत के प्रयासोंको प्रभावी रूप से देखा जा सकता है। सर्वोत्तम उपलब्ध प्रतिभाओं को नियोजित करके, एक सतत प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, ताकि ‘मैन एंड मशीन’ का सर्वश्रेष्ठ उत्पादन प्राप्त किया जा सके।

वर्तमान में एग्री एंड ओटीआर टायर विनिर्माण क्षमताओं के साथ परिचालित होने वाले दोनों संयंत्र ग्राहकों को सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले टायर साबित करने में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता हैं। यहां तक कि घरेलू और निर्यात का अनुपात 30:70 होने के बावजूद, भारतीय बाजार की जरूरतों को प्राथमिकता पर पूरा किया जा रहा है। वास्तव में, घरेलू और विदेशी बाजारों से नई मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता को बढ़ाया गया है। चोपानकी में वर्तमान में निर्मित सबसे बड़ा रेडियलओटीआर आरआर 27.00आर49 (रॉक ग्रिप पैटर्न) है, और भारत में महत्वपूर्ण खनन अनुप्रयोगों के लिए बड़े आकार के टायर के आयात प्रतिस्थापन में इस टायर का आकार महत्वपूर्ण योगदानकर्ता रहा है।

दोनों संयंत्रों में स्वचालन का स्तर मिक्सर, प्रेस और टायर निर्माण मशीनों के पूरी तरह से स्वचालित होने के साथ 75-80 फीसदी है। इस प्रकार के टायर बनाने के मामले श्रम उन्मुख होते हैं, यह स्वचालन का इष्टतम स्तर है जो इन सयंत्रों के लिए हासिल किया गया है। नए टायर आकार और पैटर्न को इंजीनियर और विकसित करने के लिए गहन अनुसंधान और विकास के लिए बीकेटी की इच्छा ने इन दोनों संयंत्रों में आरएंडडी सुविधाओं का निर्माण किया है। यहां से, बीकेटी के इंजीनियर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार कई परीक्षणों के माध्यम से उत्पाद की गुणवत्ता और प्रदर्शन की तुलना करते हैं और मूल्यांकन करते हैं। बीकेटी के लिए उपयोगी सूचना संसाधन में कंपाउंड और नए मैटेरियल के अनुसंधान और विकास पर गहन शोध किया जाता है।

बीकेटी जहां इन संयंत्रों में कई पहल कर रहा है, वहीं यह इन क्षेत्रों में स्थानीय समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी पूरा कर रहा है। कंपनी पिछले 8 सालों से भिवाड़ी और चोपांकी केआसपास के विभिन्न छात्रों के लिए एक स्थानीय गैर सरकारी संगठन के माध्यम से शिक्षा का प्रायोजन कर रही है। बीकेटी पर्यावरण संरक्षण और देखभाल में भी बहुत दृढ़ हैः कंपनी द्वारा प्राप्त किए गए कई क्रेडिट और सर्टिफिकेशन के अलावा कंपनी लगातार तीन साल से राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार से सम्मानित हो रही है, जो कि भारत सरकार की ओर से प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन करने वाली चुनिंदा कंपनियों को दिया जाता है। बीकेटी में प्रबंध निदेशक, श्री राजीव पोद्दार जेटी कहते हैं, ‘हम अपने कार्बन फुटप्रिंट के बारे में बहुत सचेत हैं और इसे कम करने के महत्व के बारे में जितना हम कर सकते हैं। 2004 के बाद से, उत्तरी भारत में इन दो उत्पादन संयंत्रों की ऊर्जा आवश्यकताओं का 50 फीसदी पवन ऊर्जा फील्ड से मिलता है, जहां बीकेटी ने जैसलमेर (राजस्थान) में निवेश किया है।’

अपने उत्पादों का विपणन और प्रचार करते हुए, बीकेटी पर्यावरण की भी सेवा कर रहा है। हाल ही में, बीकेटी ने शंकर सीमेंट तमिलनाडु ट्वेंटी 20 प्रीमियर लीग 1⁄4टीएनपीएल1⁄2 के दौरान एक अनूठी गतिविधि शुरू की है, जहां क्रिकेट की प्रकृति को मदर नेचर की देखभाल के साथ मिश्रित किया गया। बीकेटी ने दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में एक अनूठी पहल के तहत 50,000 पेड़ लगाने की प्रतिज्ञा की है। टीएनपीएल के मैचों के दौरान, दो विशाल बीकेटी टायर बाउंड्री के अंदर रखे गए थे। जब भी गेंद इनमें से किसी भी विशालकाय टायर से टकराती तो बीकेटी तमिलनाडु राज्य में लगाए जाने के लिए 500 पेड़ों का दान करेगा। टीएनपीएल के प्लेऑफ में, हर बार विशालकाय टायर पर हिट किए जाने पर 10,000 पेड़ लगाए जाने थे, जो फाइनल के दौरान 20,000 पेड़ों तक पहुंच जाएंगे। इस परियोजना को ईशा फाउंडेशन, एक एनपीओ के सहयोग से निष्पादित किया जाएगा, जो भारतीय रहस्यवादी और योगी सद्गुरु की ओर से स्थापित एनपीओ है। यह ईशा फाउंडेशन के साथ बीकेटी का पहला सहयोग है।

अंत में, यह बताना उचित होगा कि केवल घरेलू उत्पादों के साथ आयातित उत्पादों को प्रतिस्थापित करना न तो एकमात्र उद्देश्य है और न ही समाधान है। नवाचार की दिशा में अनुसंधानऔर विकास प्रयासों और प्रोत्साहन पर पूर्ण ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए, ताकि समझदार उपभोक्ताओं को सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले उत्पाद मिलें।

जहां बीकेटी कई अलग-अलग मापदंडों पर अपनी ताकत विकसित करने के लिए काम कर रहा है ताकि बेहतर विनिर्माण प्रणालियों के विकास, उत्पाद रेंज में वृद्धि, सेवा स्तरों में सुधार, उत्पाद की पेशकश को अनुकूलित करना, बाजार कवरेज में वृद्धि, ब्रांड दृश्यता में सुधार करना आदि, वहीं बीकेटी सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के आधार वाले अपने विजन को भी साथ लेकर चलती है। कंपनी दुनिया भर में कई मोर्चा पर कई परियोजनाओं के लिए अभियान चलाती है। बीकेटी में विचार और निवेश, दुनिया को हर किसी के लिए एक बेहतर स्थान बनाने में योगदान कर रहे हैं!

बता दें बीकेटी कि भिवाड़ी और चोपांकी स्थित मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में ऑफ-रोड टायर्स का निर्माण होता है। यहां कंपनी कृषि, औद्योगिक, अर्थमूविंग, खनन, एटीवी और बागवानी क्षेत्र में वाहनों के लिए डिजाइन किए गए ऑफ-हाइवे टायरों का निर्माण करती है। फिलहाल कंपनी के पास 2,700 से अधिक अलग-अलग तरह के ऑफ-रोड टायर मौजूद हैं और इन टायर्स को दुनिया भर में 160 से अधिक देशों में बेचा जाता है।