22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इंफोसिस में अब सबकुछ ठीक : नारायणमूर्ति

निलेकणी बेहद सुलझे हुए हैं और जटिल से जटिल चीजों को आसान बना देना उनकी मजबूती है : नारायणमूर्ति

2 min read
Google source verification
NarayanMurthy

बेंगलूरु। सूचना-प्रौद्योगिकी की अग्रणी कंपनी इंफोसिस के संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति ने कहा है कि कंपनी में ‘सबकुछ ठीक’ चल रहा है। यहां बुधवार को इंफोसिस साइंस फाउंडेशन पुरस्कारों की घोषणा के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मूर्ति ने कहा कि चेयरमैन नंदन निलेकणी जटिलताओं को सहजता से हल कर लेंगे। मूर्ति ने कहा ‘याद कीजिए, निवेशकों को संबोधित करते हुए अपने भाषण में मैंने क्या कहा था। मैनें कहा था कि अब नंदन चेयरमैन हैं तो हम सभी चैन से सो सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि निलेकणी बेहद सुलझे हुए हैं और जटिल से जटिल चीजों को आसान बना देना उनकी मजबूती है। कंपनी में काफी जटिलताएं थीं और इस कारण उनके पास बहुत काम है। अब सबकुछ उन पर छोड़ देना चाहिए और चुप रहना चाहिए ताकि वह अपना काम अच्छे से निष्पादित कर सके।


मूर्ति ने कहा कि निलेकणी को कोई सुझााव देने की आवश्यकता नहीं है। वह एक अच्छे मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रहे हैं और जानते हैं कि किस चीज की जरूरत है। इसीलिए उन्हें सलाह की जरूरत नहीं है।


इंफोसिस साइंस पुरस्कारों की घोषणा

इंफोसिस फाउंडेशन की ओर से दिए जाने वाले साइंस पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। छह श्रेणियों में चुने गए विजेताओं को 65 लाख रुपए नगद, एक प्रशस्ति पत्र और 22 कैरेट सोने से बना एक स्वर्ण पदक प्रदान किया जाता है। आगामी 10 जनवरी को बेंगलूरु में एक समारोह के दौरान विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। गुरुत्वाकर्षण तरंगों पर अपनी खोज के लिए वर्ष 2017 का भौतिकी नोबल पुरस्कार जीतने वाले प्रोफेसर किप एस.थोर्ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान करेंगे। इस साल के पुरस्कार विजेता इस प्रकार हैं। प्रो. संघमित्रा बंदोपाध्याय (इंजीनियरिंग एवं कंप्यूटर साइंस), भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता की निदेशिका संघमित्रा बंदोपाध्याय ने स्तन कैंसर, एचआईवी और कैंसर के परस्पर संबंधों का निर्धारण और अल्जाइमर रोग में श्वेत कोशिकाओं की भूमिका पर अहम खोज की हैं।


प्रोफेसर अनन्या जहांआरा कबीर (मानविकी): किंग्स कॉलेज, लंदन की अंग्रेजी साहित्य प्रोफेसर अनन्या ने आधुनिक औपनिवेशिकता में वैचारिकता, समाजिकता और संस्कृति तथा कश्मीर में सांस्कृतिक एवं राजनीतिक जीवन के सूक्ष्म और व्यवहारिक मानव विज्ञान जैसे दीर्घकालिक ऐतिहासिक तत्वों का मौलिक अन्वेषण कर इस पुरस्कार को प्राप्त किया है। प्रोफेसर उपिंदर सिंह भल्ला (लाइफ साइंसेज): बेंगलूरु स्थित राष्ट्रीय जीव विज्ञान केंद्र (एनसीबीएस), बेंगलूरु के प्रोफेसर उपिंदर सिंह भल्ला ने मस्तिष्क की कंप्यूटेशनल मशीनरी की समझ में अहम योगदान दिया है। उन्होंने न्यूरॉनल कंप्यूटेशन का पता लगाया जो जटिल संवेदनशील जानकारियों को इंटीग्रेट एवं संग्रहित करता है तथा इन सूचनाओं का उपयोग निर्णय अथवा कोई कार्रवाई करने में करता है।


प्रोफेसर रीताब्रत मुंशी (गणितीय विज्ञान): टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर), मुंबई और भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता के प्रोफेसर रीताब्रत मुंशी को संख्या पद्धति के विश्लेषणात्मक पहलुओं में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए चुना गया है। प्रोफेसर यमुना कृष्णन (भौतिक विज्ञान): शिकागो विश्वविद्यालय के रसायन
विभाग की प्रोफेसर यमुना कृष्णन को डीएनए आर्किटक्चर में नवीन खोज के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।


प्रोफेसर लॉरेंस लियांग (सामाजिक विज्ञान): स्कूल ऑफ लॉ, अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली के प्रोफेसर लॉरेंस को कानून एवं समाज पर उनकी सृजनात्मक विद्वता को मान्यता प्रदान करते हुए इस पुरस्कार के लिए चुना गया। फाउंडेशन न्यासी बोर्ड के अध्यक्ष एमके दिनेश कहा कि ने यह पुरस्कार शोधार्थियों एवं वैज्ञानिकों के प्रेरणादायी अनुसधानों के लिए है। पुरस्कार के लिए चुनी गई हस्तियों का समाज के उत्थान में जबरदस्त योगदान रहा है और उन्हें उम्मीद है कि वे अगली पीढ़ी के देश के वैज्ञानिकों को पे्ररित करेंगे। विजेताओं का चयन विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थाओं से नामित 236 नामित सदस्यों में से किया गया।