
Budget 2020 Expectations
नई दिल्ली। 1 फरवरी को बजट 2020 (Budget 2020) पेश किया जाएगा। बजट पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं। भारत की GDP ग्रोथ रेट की बात करें तो 6 साल में 5 फीसदी नीचे आ गई है। ऐसे में उम्मीद जताई जा है कि सरकार इस बजट में अर्थव्यवस्था को सुधारने को लिए कई कड़े कदम उठाएगाी। आर्थिक व्यवस्था को ठीक करने के साथ सरकार को सोशल सेक्टर को भी बजट में अहमियत देनी चाहिए है क्योंकि ये सेक्टर फंड और संसाधनों से पहले ही जूझ रहा है।
बजट में मात्र मानवीय विकास के लिए केवल इकोनॉमिक ग्रोथ को पाना ही बड़ी उपलब्धि नहीं है बल्कि हेल्थकेयर, स्वच्छता, और शिक्षा को और विकसित करना चाहिए। सोशल सेक्टर पर खर्च करना और ध्यान देने से पूरे देश में विकास की ओर बढ़ा जा सकता है।
बजट 2020 में हेल्थकेयर और सोशल सेक्टर के लिए है कुछ खास
हेल्थकेयर (Healthcare) पर खर्चें की बात करें तो इस समय इस सेक्टर पर जीडीपी का मात्र 1 फीसदी ही खर्च होता है। दूसरें देशों से तुलना करें तो ये बहुत कम है। वहीं सरकार 2025 तक इस खर्च को बढ़ाकर 2.5फीसदी करने की चाह बता चुकी है। सरकार द्वारा चलाई जा रही स्कीम आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री जन आरोग्य को भी अगर ठीक प्रकार से चलाया जाए तो देश के हर गांव और इलाके में लोग इस स्कीम का फायदा उठा पाएंगे। आयुष्मान भारत स्कीम के फंड की बात करें तो 6400 करोड़ आवंटन मिला था ये स्वास्थ्य बजट का सबसे बड़ा हिस्से होने के बावजूद भी स्कीम को भारी फंड कमी महसूस होती है।
बजट में प्रधानमंत्री जन आरोग्य स्कीम को लेकर कई उम्मीदे जताई जा रही है। मना जा रहा है कि सरकार प्राइमरी हेल्थकेयर को बढ़ावा देने के लिए 1.5 लाख हेल्थ वेलनेस सेंटर्स खोलने का ऐलान कर सकती है। साथ ही दूर-दराज बसे गांवों में भी मेडिकल में एमबीबीएस और पीजी सीट्स भी बढ़ाई जा सकती हैं। अगले दशक में कम से कम 100 जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज में अपग्रेड करने का प्लान भी सरकार के एजेंडे में टॉप में रहना चाहिए। अस्पतालों की गिनती को भी बढ़ाई जा सकती है।
हर परिवार को मिलेंं हेल्थ इंश्योरेंस और सैनिटेशन का लाभ
बजट में हेल्थ इंश्योरेंस और सैनिटेशन पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए। क्योंकि अगर आयुष्मान भारत स्कीम ही बात करें तो ये गरीबी रेखा से नीचे के लोगों की बीमारियों के खर्च को पूरी तरह से कवर करता है। शायद अब मिडिल क्लास के लोगों के लिए भी इस बारें में सोचने की जरूरत है। क्योंकि अभी भी देश के कई लोग या परिवार ऐसे हैं जिन तक इन सुविधाओं का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। इस लिए सरकार को सस्ते हेल्थ इंश्योरेंस जैसी पॉलिसी को लेकर आना चाहिए क्योंकि कुछ लोगों की बीमारियां पुरानी होने के कारण वो कार्ड का इस्तेमाल नहीं कर पाते है।
फंड का पूर्णरूप से हो रहा है प्रयोग
‘द बजट ट्रेल्स बाई द टाटा ट्रस्ट्स एंड सेंटर फॉर बजट एंड गवर्नेंस अकाउंटेबिलिटी’ रिपोर्ट में पाया गया कि 2017 से 2019 में केन्द्र द्वारा प्रायोजित सोशल सेक्टर स्कीम्स ने फंड का 85 फीसदी से ज्यादा इस्तेमाल किया गया। जिससे ये बात सामने आई कि सोशल सेक्टर स्कीम्स में मिलने वाले फंड का पूरी तरह से लाभ उठाया गया।
Published on:
30 Jan 2020 01:49 pm
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