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30 साल में कश्मीर में पर्यटन उद्योग को हुआ 90 फीसदी का नुकसान

जम्मू-कश्मीर होटेसिअर्स क्लब के चेयरमैन मुश्ताक अहमद चया के अनुसार 2017 में मर्इ आैर जून के महीनों में 40 से 60 फीसदी होटल भरे हुए थे, जबकि इस साल महज 05 से 10 फीसदी की ही बुकिंग हो सकी है।

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Saurabh Sharma

Jun 26, 2018

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30 साल में कश्मीर में 90 फीसदी हुआ पर्यटन उद्योग का नुकसान

नर्इ दिल्ली। जब भी हत देश में घूमने की बात करते हैं तो धरती के स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर की आेर इशारा करते हैं। जहां खूबसूरत वादियां हैं। एेसे खूबसूरत पहाड़ आैर घाटियां हैं जहां लोग अपने आप को भी भूल जाते हैं। इसलिए कश्मीर को देश का सबसे बड़ा टूरिस्ट प्लेस भी कहा जाता है। जहां सिर्फ देशी ही नहीं विदेशी भी इस स्वर्ग में आते हैं आैर यहां नजारों को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

पिछले महीने टूरिस्ट की हुर्इ थी मौत
पिछले कुछ समय से इस स्वर्ग को किसी की नजर लगी हुर्इ है। जहां रोज आतंकवाद आैर उसे खत्म करने के आर्मी के आॅपरेशन की वजह से टूरिज्म काफी प्रभावित हुआ है। खास बात तो ये है कि पिछले महीने ही कश्मीर के पत्थरबाजों की वजह से तमिलनाडु के एक व्यक्ति की मौत हो गर्इ थी। वहीं दूसरी आेर गर्मियों के मौसम में जिस तरह का टूरिज्म कश्मीर में रहता था वो पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है। लोगों ने आतंकी घटनाआें आैर पत्थरबाजों की वजह से कश्मीर की आेर जाना खत्म सा कर दिया है।

कम हो गए टूरिस्ट
जम्मू-कश्मीर होटेसिअर्स क्लब के चेयरमैन मुश्ताक अहमद चया के अनुसार 2017 में मर्इ आैर जून के महीनों में 40 से 60 फीसदी होटल भरे हुए थे, जबकि इस साल महज 05 से 10 फीसदी की ही बुकिंग हो सकी है। राज्य में हाल ही में हुई हिंसा, पथराव और आतंकी मुठभेड़ की खबरों को मीडिया कवरेज मिलने के चलते पर्यटक यहां से दूरी बना रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर की कमार्इ का सोर्स
जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था के लिए पर्यटन सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है। पर्यटन राज्य के जीडीपी (सकल देशी उत्पाद) में 8 फीसदी योगदान देता है। राज्य में पर्यटन उद्योग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 100,000 से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करता है, सुरक्षा व्यवस्था (कर्फ़्यू) के कारण इस क्षेत्र को काफी नुकसान पहुंचता है, राज्य में कार्यरत सभी लोग प्रतिकूल रूप से प्रभावित होते हैं।

कुछ एेसे गिरा कश्मीर में पर्यटन का ग्राफ
- वर्ष 1988 से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के बीच एक पसंदीदा स्थान रहा है, जिसमें 7,00,000 (सात लाख) से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ हैं।
- अगले साल वर्ष 1989 से कश्मीर में सशस्त्र हिंसा की शुरुआत हुई जिसमें 1,500 हिंसक घटनाएं हुई थी। इस हिंसा ने पर्यटन उद्योग को स्वाभाविक रूप से प्रभावित किया है और आने वाले पर्यटकों की संख्या 7,00,000 में से 2,00,000 तक कम हो गई।
- कश्मीर में वर्ष 1989 के बाद से हिंसा बढ़ी, 1990 में 4,211 और 1991 में 3,780 हिंसक घटनाएं हुईं। इससे नादिर में पर्यटन उद्योग में पर्यटकों का आना भी 6,287 कम हो गया। यह पर्यटन उद्योग में 98% की कमी है।
- 1996 की शुरुआत में घाटी (कश्मीर) में हिंसा कम हुई जिससे पर्यटन को राहत मिली और राज्यपाल शासन के आठ साल बाद विधानसभा चुनाव आयोजित किए गए। वर्ष 1998 में 100,000 से अधिक पर्यटक कश्मीर पहुंचे।
- राहत अल्पकालिक ही थी और वर्ष 2001 में संसद पर हमले ने भारत और पाकिस्तान को युद्ध के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया। जिसने पर्यटन उद्योग को फिर से प्रभावित किया और पर्यटकों की संख्या तेजी से 27,356 तक कम हो गई।
- भारत-पाकिस्तान की 2003 में शांति वार्ता हुई जिससे मामला सुधरा और पर्यटन में लगातार 1.3 मिलियन तक बोढ़तरी हुई। लेकिन, इस बार प्रकृति के प्रकोप ने कहर खड़ा कर दिया और 2015 में आई बाढ़ ने पर्यटन उद्योग को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया जिसने पर्यटकों के आवागमन के साथ-साथ बुनियादी ढाँचे को भी प्रभावित किया।