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दवाइयों पर मोदी सरका ने लिया ये बड़ा फैसला, आम लोगों से लेकर देसी फार्मा कंपनियों पर पड़ेगा असर

अब सरकार दवाइयों की सार्वजनिक खरीद में इंडिया घरेलू दवाआें को अधिक तरजीह देगी। मौजूदा वित्त वर्ष में दवाइयाें की सरकारी खरीद में कम से कम 75 फीसदी की खरीद लोकल कंपोनेंट वाली दवाआें को ही दी जाएगी।

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दवाइयों पर मोदी सरका ने लिया ये बड़ा फैसला, आम लोगों से लेकर देसी फार्मा कंपनियों पर पड़ेगा असर

नर्इ दिल्ली।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने सबसे महत्वकांक्षी परियोजनाआें में से एक मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास में लगी हुर्इ है। इस प्रोजेक्ट के तहत सरकार अलग-अलग सेक्टर में घरेलू उत्पादों को बढ़ावा दे रही है। इसी कड़ी में सरकार ने दवाइयों को लेकर भी एक बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, अब सरकार दवाइयों की सार्वजनिक खरीद में इंडिया घरेलू दवाआें को अधिक तरजीह देगी। मौजूदा वित्त वर्ष में दवाइयाें की सरकारी खरीद में कम से कम 75 फीसदी की खरीद लोकल कंपोनेंट वाली दवाआें को ही दी जाएगी।


आम अादमी के साथ-साथ देसी फार्मा कंपनियों को भी होगा फायदा

सरकार का प्लान साल 2023-25 तक इसे बढ़ाकर 90 फीसदी तक किया जाएगा। सरकार के आैषधि विभाग ने भी इसके बारे में जानकारी दी है। सरकार ने यह फैसला मेक इन इंडिया में आैषधि क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए लिया है। इससे आम आदमी को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वो अब देश में बने लोकल कंपोनेंट वाली दवआें को इस्तेमाल कर सकेंगे। साथ ही लोकल फार्मा कंपनियों को भी कारोबार को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।


स्थानीय अवयवों को बढ़ेगा इस्तेमाल

आैषधि विभाग ने अपने आदेश में कहा है कि इस तरह की दवाआें में स्थानीय अवयवों को साल 2019-21 तक 15 फीसदी, 2021-23 तक 20 फीसदी आैर 2023-25 तक 30 फीसदी तक बढ़ा दिया जाएगा। इसका मतलब है कि साल 2023-25 तक जिन दवाआें को भारत में तैयार किया जाता है उन्हें भारत सरकार तभी खरीदेगी जब उनमें 30 फीसदी तक स्थानीय अवयवों का इस्तेमाल किया जाएगा।


घरेलू फार्मा कंपनियों को भी बढ़ाना होगा स्थानीय अवयवों की मात्रा

आदेश में यह भी कहा गया है कि भारत में तैयार की गर्इ दवआें को चालू वित्त वर्ष में तभी खरीदारी करेगी जब उनमें कम से कम 75 फीसदी स्थानीय अवयवों होगा। साल 2019-21 में यह 80 फीसदी तक, साल 2021-23 में 85 फीसदी आैर साल 2023-25 में इसे बढ़ाकर 90 फीसदी तक बढ़ाया जाएगा।
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