
investors are ready to invest in UP
नई दिल्ली। केंद्र सरकार की ओर से नए स्टार्टअप शुरू करने के लिए टैक्स छूट और दूसरी रियायतों का असर होता नहीं दिख रहा है। ऐसा इसलिए कि साल 2016 में जहां 6 हजार से ज्यादा इंटरनेट और टेक्नोलॉजी के नए स्टार्टअप्स शुरू हुए थे वहीं, 2017 के शुरुआती नौ महीनों में केवल 800 नए स्टार्टअप्स ही लॉन्च हुए हैं। स्टार्टअप ट्रैकर ट्रैक्सन के डाटा के मुताबिक, लगातार दो साल से नए स्टार्टअप्स की संख्या तेजी गिरती जा रही है। यह इस बात को दर्शाता है कि बड़ी इंटरनेट कंपनियां जैसे स्नैपडील को संघर्षों का सामना करना पड़ रहा है और ई-कॉमर्स मार्केट की ग्रोथ धीमी पड़ती जा रही है। बढ़ते हुए इंडियन स्टार्टअप ईकोसिस्टम के लिए नए स्टार्टअप्स में गिरावट आना एक चिंता का विषय है। साल 2014 और 2015 एक तरह से बेहतरीन वर्ष रहे जहां निवेेशकों ने इस विश्वास के साथ पैसा लगाया कि कम समय में उनको शानदार रिटर्न मिलेगा।
स्टार्टअप्स से क्यों हुआ मोहभंग
रिपोर्ट के मुताबिक कई अंंत्रप्रेन्योर्स जिन्होंने साल 2014 और 2015 में कंज्यूमर इंटरनेट कंपनियों को शुरू किया वह पिछले 18 महीने से सर्विस, बिजनेस टू बिजनेस ई-कॉमर्स और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी जैसे एरिया पर शिफ्ट हो गए हैं। अगर, ई-कॉमर्स और कंज्यूमर इंटरनेट मार्केट दोबारा से रफ्तार पकड़ता है तो अंत्रप्रेन्योर्स फिर से शिफ्ट होने की कोशिश कर सकते हैं। ट्रैक्सन के डाटा के मुताबिक निवेश में भी कमी आई है।
ई-कॉमर्स कंपनियों की ग्रोथ हुई सुस्त
2016 की शुरुआत से ही ई-कॉमर्स मार्केट का विस्तार एक तरह से रूक सा गया। इसके बाद से ज्यादातर ई-कॉमर्स कंपनियां जो ग्रोथ के लिए हैवी डिस्काउंट और एडवर्टाइजिंग पर निर्भर थी वह मार्केट में बने रहने के लिए सही बिजनेस मॉडल्स को तलाशने के लिए संघर्ष करने लगीं। रेडशियर मैनेजमेंट कंसलटेंसी के मुताबिक, बीते साल, ई-कॉमर्स मार्केट में 15 फीसदी से कम ग्रोथ हासिल की है। यह मार्केट 14 अरब डॉलर से 15 अरब डॉलर पर पहुंची है।
Published on:
04 Oct 2017 10:50 am
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