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नई दिल्ली। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने टिकट रद्द करने की स्थिति में एयरलाइंसों द्वारा मनमाना शुल्क वसूल किए जाने पर लगाम लगाने के लिए अधिकतम कैंसिलेशन शुल्क मूल किराये के बराबर करने का प्रस्ताव किया है।
नागिरक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू ने एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी देते हुए कहा कि नए प्रस्ताव के तहत किसी भी स्थिति में एयरलाइंस मूल किराये से ज्यादा कैंसिलेशन शुल्क नहीं वसूल पाएंगे। वे रिफंड प्रोसेसिंग के नाम पर भी कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लेंगे। टिकट रद्द कराने या किसी भी कारण से यात्री के समय पर नहीं पहुँचने की स्थिति में भी ये निमय लागू होंगे।
इसके अलावा हर स्थिति में रिफंड की जिम्मेदारी एयरलाइंसों पर डालते हुए इसके लिए अधिकतम समय सीमा भी तय की गई है। राजू ने कहा "टिकट रद्द कराने या यात्री के नहीं आने की स्थिति में किराए में शामिल सभी प्रकार के कर तथा यूजर डेवलपमेंट फी/हवाई अड्डा विकास शुल्क/यात्री सेवा शुल्क यात्रियों को वापस किए जाएंगे।"
इस स्थिति में भी कंपनियां मूल किराए से अधिक वसूल नहीं कर सकेंगी। ये नियम प्रोमोशनल या विशेष छूटों के तहत जारी किए गए टिकटों समेत हर तरह के टिकट पर लागू होंगे। देश में विमान सेवा देने वाली विदेशी कंपनियों के मामले में उनके देश के कानून उन पर लागू होंगे, हालाँकि रिफंड के तरीके और समयावधि भारतीय कानून के अनुरूप होगी।
Published on:
11 Jun 2016 01:25 pm
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