सरकार का मकसद कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम करने वाले सभी वर्कस को पीएफ की सुविधा मुहैया कराना है।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ऐसी कंपनियों के खिलाफ शिकंजा कसने जा रही जो अपने वर्कर्स को पीएफ की सुविधा नहीं दे रही हैं। इसके लिए सरकार कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों के रिकॉर्ड की जांच करेगी और अपने कर्मचारियों को पीएफ की सुविधा न देने से बचने के लिए डाटा में गड़बड़ी करने वाली कंपनियों के खिलाफ एक्शन लेगी। सरकार का मकसद कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम करने वाले सभी वर्कस को पीएफ की सुविधा मुहैया कराना है। मौजूदा समय में देश में कंसट्रक्शन सेक्टर में 4 करोड़ वर्कर्स काम कर रहे हैं। इसमें से मात्र 11 लाख वर्कस को ही फीएफ की सुविधा मिल रही है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम करने वाले वर्कर्स को का पीएफ कवरेज सुनिश्चित करने के लिए इंस्पेक्शन में तेजी लाएगा। इससे नियमों के तहत अपने वर्कर्स को पीएफ का बेनेफिट न देने वाली कंपनियों की पहचान की जा सकेगी। हाल में कंस्ट्रक्शन सेक्टर पर सीबीटी की सब कमेटी की बैठक में सेंट्रल पीएफ कमिश्नर डॉ वीपी ज्वॉय ने कहा कि इंस्पेक्टरों की कमी की वजह से हम कंस्ट्रक्शन सेक्टर में गहन इंस्पेक्शन नहीं पा रहे हैं।
ट्रेड यूनियंस की मदद लेगी सरकार
सेंट्रल पीएफ कमिश्नर के मुताबिक कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम करने वाले वर्कर्स को पीएफ बेनेफिट सुनिश्चित करने के लिए ईपीएफओ ट्रेड यूनियंस की मदद भी लेगा। सरकार पीएफ कवरेज बढ़ाने के लिए रेलवे अधिकारियों के साथ नियमित तौर पर बैठकें की जा रही है जिससे रेलवे के लिए काम करने वाले कंस्ट्रक्शन वर्कर्स की पीएफ सुविधा सुनिश्चित किया जा सके। जिसके लिए बनी सब कमेटी सेक्टर से जुडें दस्तावेजों की जांच तेजी से करेगी।
पीएफ कवरेज बढ़ाने पर जोर
सीबीटी मेंबर्स ने सुझाव दिया कि कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम करने वाले वर्कर्स को पीएफ बेनेफिट सुनिश्चित करने के लिए प्रिंसिपल एम्पलॉयर को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए साथ ही कवरेज बढ़ाने के लिए कैंपों का आयोजन किया जाना चाहिए। कैंपों में ट्रेड यूनियन, एम्पलॉयर्स और एम्पलाईज को एक साथ लाकर वर्कर्स का पीएफ कवरेज बढ़ाया जा सकता है।