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5 महीनें मे ही लक्ष्य का 96 फीसदी पहुंचा वित्तीय घाटा, सरकार ने जमकर लुटाया धन

सीएजी के आंकड़े के मुताबिक अप्रैल-अगस्त के दौरान अनुमानित वित्तिय घाटा 5.25 लाख करोड़ के करीब पहुंच चुका है।

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Fiscal deficit

नई दिल्ली। मौजूदा वित्त वर्ष मे केन्द्र सरकार ने जमकर खर्च किया है। व्यय में वृद्धि के कारण बजटीय अनुमान चालू वित्त वर्ष में 96.1 फीसदी हो गया है। हालांकि अगस्त माह में पूंजीगत खर्च में बड़ी कमी आई है। सीएजी ने एक रिपोर्ट जारी किया है जिसके आंकड़े के मुताबिक अप्रैल-अगस्त के दौरान अनुमानित वित्तिय घाटा 5.25 लाख करोड़ के करीब पहुंच चुका है। वहीं 2017-18 के वित्त वर्ष में 5.46 लाख करोड़ का लक्ष्य रखा गया है। पिछले वित्तिय वर्ष के पहले पांच महीने में वित्तिय घाटा वार्षिक लक्ष्य का 76.4 फीसदी था।


हालांकि मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार ने वित्तिय घाटे को जीडीपी पिछले वर्ष के 3.5 फीसदी के मुकाबले 3.2 फीसदी तक सीमित रखने का लक्ष्य निर्धारित किया है। सरकार ने लक्ष्य को पूरा करने को कहा है। कई वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इसका कारण बजट का थोड़ा पहले पेश करना है, जिसके चलते खर्च में बढ़ोतरी हुई है। एक अधिकारी के मुताबिक, इस वर्ष अब तक 1.48 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त व्यय हो चुका है। पिछले साल अगस्त तक के 8 लाख करोड़ के मुकाबले इस साल अगस्त तक 9.5 लाख करोड़ व्यय हो चुका है।


आपको बता दें कि पूंजीगत व्यय बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए इस्तेमाल में आता है जिसमें 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुआ है अगस्त माह में ये घटकर 14,522 करोड़ रुपए रहा। अधिकारियों का मानना है कि इसके लिए मौसमी कारक वजह है और सरकार सुस्त निजि निवेश की भरपाई के लिए सरकारी खर्च बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्ष 2016 में अप्रैल से अगस्त के बीच पंूजीगत व्यय बजट का अनुमान 37 फीसदी था जबकि इस साल अब तक वित्तिय घाटे का अनुमान 35.5 फीसदी है। यदि कुल व्यय की बात करें तो यह चालू वित्त वर्ष में 44.3 फीसदी है जो कि एक साल पहले तक 40.5 फीसदी ही था। सीएजी के आंकड़े के अनुसार अप्रैल-अगस्त के अवधि में सरकार को 4.09 लाख करोड़ करी आमदनी हुई है। ये पूरे वित्त वर्ष का अनुमानित 15.15 लाख करोड़ का 27 फीसदी है। अभी इस अवधि तक राजस्व का 28 फीसदी हासिल हो चुका है।


इस मामले से जुड़े एक विशेषज्ञ का कहना है कि, वित्त वर्ष 2018 के शुरूआती महीनों मे व्यय बढऩे से अगस्त में खर्च की गति सुस्त हो गई है। अगस्त में राजस्व व्यय में जहां 2 फीसदी की मामूली वृद्धि हुई है, वहीं पूंजीगत व्यय सीधा 28 फीसदी पर आ गया है। अगस्त मे व्यय कम होने के कारण जुलाई के आखिर तक वित्तिय घाटा इस स्तर तक पहुंच गया हैं।