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बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद के उत्पादों की बिक्री कम हुर्इ, लोगों को नहीं भा रहे स्वदेशी प्रोडक्ट्स

एक ग्लोबल कंज्यूर रिसर्च के आकंड़ों के मुताबिक अक्टूबर से मार्च 2018 के दौरान पतंजलि के सेल्स वाॅल्युम 7 फीसदी ही रहा जो कि अप्रैल से सितंबर 2017 के दौरान 22 फीसदी था।

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Patanjali

बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद के उत्पादों की बिक्री कम हुर्इ, लोगों नहीं भा रहे स्वदेशा प्रोडक्ट्स

नर्इ दिल्ली। योग गुरू से बिजनेस गुरू की राह पर चलने वाले बाबा रामदेव की चमक अब फीका पड़ते हुए दिखार्इ दे रहा है। दरअसल पिछला एक साल रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद के लिए कुछ खास नहीं रहा है। पतंजलि के उत्पादों के लिए जो सबसे बड़ी यूएसपी थी, उसे अब कर्इ बहुराष्ट्रीय कंपनियों भी भुनाने लगी हैं। पतंजलि अायुर्वेद को टक्कर देने के लिए एफएमसीजी सेक्टर की कर्इ बड़ी कंपनियों ने बाजार में अपने हर्बल प्रोडक्ट्स को बड़ी तेजी से उतारा है। सबसे दिलचस्प बात ये देखने को मिली है कि इस दौरान इन कंपनियों ने पतंजलि को पटखनी भी दिया है।


क्रेडिट सुर्इस ने भी जतार्इ थी चिंता
एक ग्लोबल कंज्यूर रिसर्च के आकंड़ों के मुताबिक अक्टूबर से मार्च 2018 के दौरान पतंजलि के सेल्स वाॅल्युम 7 फीसदी ही रहा जो कि अप्रैल से सितंबर 2017 के दौरान 22 फीसदी था। अप्रैल-सितंबर 2016 में ये अांकड़ा 49 फीसदी था अौर अक्टूबर-मार्च 2017 में 52 फीसदी था। अभी पिछले सप्ताह ही क्रेडिट सुर्इस ने कहा था कि पिछले चार सालों में पतंजलि आयुर्वेद का वित्त वर्ष 2018 में 100 फीसदी से फिसला है। हालांकि इस कंपनी ने पंतजलि की पूरी कमार्इ के बारे में कोर्इ जानकारी नहीं दी। इसपर कंपनी ने कहा कि वो बाजार में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में सफल रही है आैर देश के लगभग हर घर तक अपनी पहुंच बनार्इ है।


छोटे से फार्मेस शुरू हुर्इ थी कंपनी
बताते चलें की साल 1997 पहली बार पतंजलि आयुर्वेद की शुरुआत एक छोटे फार्मेसी से हुर्इ थी। इसके बाद पतंजलि ने काफी तेजी से अपने कारोबार का विस्तार किया। आज पतंजलि आयुर्वेद टूथपेस्ट, शैम्पू से लेकर पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स आैर काॅर्नफ्लेक्स आैर नूडल्स जैसे बाजार में बेचती है। साल 2013के बाद कंपनी की सालाना सेल्स लगभग दोगुनी रफ्तार से बढ़ी है। इसके बाद पतंजलि आयुर्वेद 10,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गर्इ। लेकिन पतंजलि की यही सफलता दूसरी हर्बल कंपनियों के लिए कैटेलिस्ट के तौर पर काम किया जो कि अब पूरे कंज्यूमर बाजार का 10 फीसदी का कब्जा है। साल 2013 से 2018 के बीच इन कंपनियों का सेल्स 21 फीसदी की दर से बढ़ा जो कि इसके पहले 11 फीसदी की दर पर था।