
क्रिसिल की रिपोर्ट का दावा, शुगर इंडस्ट्री को नहीं मिलेगी 8000 करोड़ रुपए के पैकेज से भी राहत
नई दिल्ली। अगर आप गन्ना किसान है आैर केंद्र सरकार के राहत पैकेज से खुश हैं तो आपको बड़ा झटका लग सकता है। क्योंकि जिस पैकेज के सहारे गन्ना किसानों को केंद्र सरकार साधने में लगी हुर्इ है उससे कोर्इ फायदा नहीं होने जा रहा है। क्रिसिल रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार के राहत पैकेज से गन्ना किसानों को शुगर इंडस्ट्री को कोर्इ फायदा नहीं मिलेगा। इससे भाकियू के नेता भी इस बात कह चुके हैं कि राहत पैकेज कोर्इ आखिरी समाधान नहीं है। इससे पहले पहले की सरकारें किसानों को पैकेज देती रही हैं, लेकिन कोर्इ फायदा नहीं हुआ है। एेसे में किसानों को पूर्ण समाधान की जरुरत है। आइए जानने की कोशिश करते हैं कि क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में क्या कहा है…
सिर्फ 40 फीसदी ही मिलेगी राहत
केंद्र सरकार की तरफ से जारी गन्ना किसानों के राहत पैकेज से 40 फीसदी बकाया ही दिया जा सकेगा। गन्ना किसानों का मई तक मिलों पर करीब 22 हजार करोड़ रुपए बकाया है। कैबिनेट ने बुधवार को गन्ना किसानों के लिए करीब 8 हजार करोड़ रुपए का पैकेज मंजूर किया था। जो किसानों को पूरा पड़ता हुआ नहीं दिखार्इ दे रहा है। जानकारों की मानें तो किसानों के लिए पैकेज उंट के मुंह में जीरे के बराबर है।
क्रिसिल की रिपोर्ट में खुलासा
क्रिसिल ने एक रिपोर्ट जारी दावा किया है कि सरकार के बेलआउट पैकेज का इरादा सही है, लेकिन इसमें शुगर सेक्टर की दिक्कतों की तरफ ध्यान नहीं दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार शुगर सेक्टर में गन्ने से लेकर एंड प्रॉडक्ट पर ध्यान देने की जरूरत है। जो केंद्र ने नहीं किया है। जिससे किसानों को ज्यादा राहत मिलने की कम हह उम्मीद है।
इंडस्ट्री के पास पहुंचेगा इतना रुपया
शुगर का बफर स्टॉक बनाने और चीनी का एक्स फैक्ट्री दाम तय करने से इंडस्ट्री के पास तुरंत 3,500-4,000 करोड़ रुपए पहुंच जाएगा। पूरे साल में यह अमाउंट 9100 करोड़ तक हो सकता है। यह पैसा गन्ना किसानों के कुल बकाया का करीब 40 फीसदी ही होता है। जो बहुत ही कम है। जबकि किसानों का बकाया करीब 22हजार करोड़ रुपए है।
29 रुपए होंगे मिल गेट पर चीनी के दाम
सरकार ने मिल गेट पर चीनी के दाम 29 रुपए प्रति किलो तय किए हैं, जिनको बाद में बढ़ाया जा सकता है। इसकी समीक्षा फेयर एंड पारिश्रमिक प्राइज (FRP) को ध्यान में रखते हुए की जाएगी। उम्मीद है कि 30 लाख टन का बफर स्टाॅक बनाने में सरकार 1175 करोड़ रुपए का खर्च करेगी। इससे चीनी मिलों को थोड़ी राहत मिलेगी।
Published on:
08 Jun 2018 09:02 am
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