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एथेनॉल प्लांट के लिए चार उद्योगों को 32 हजार हेक्टेयर भूमि आवंटित

भविष्य के ईंधन के रूप में एथेनॉल को महत्व दिया जा रहा है। पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों के बीच पेट्रोलियम कंपनियां इसका मिश्रण बढ़ा रही हैं। पहले यह 10 प्रतिशत था, अब इसकी मात्रा बढ़ रही है। भविष्य में इसका व्यापक पैमाने पर उपयोग की सम्भावना है।

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एथेनॉल प्लांट के लिए चार उद्योगों को 32 हजार हेक्टेयर भूमि आवंटित

जबलपुर। जबलपुर व आसपास के तीनों प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में वृहद उद्योगों के रूप में एथेनॉल निर्माण इकाइयां अब जल्द स्थापित होंगी। एमपीआइडीसी ने हाल ही में चार उद्योगों को 32 हेक्टेयर भूमि आवंटित की है। इसमें 550 करोड़ का निवेश और छह सौ लोगों को रोजगार मिल सकता है।

भविष्य के ईंधन के रूप में एथेनॉल को महत्व दिया जा रहा है। पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों के बीच पेट्रोलियम कंपनियां इसका मिश्रण बढ़ा रही हैं। पहले यह 10 प्रतिशत था, अब इसकी मात्रा बढ़ रही है। भविष्य में इसका व्यापक पैमाने पर उपयोग की सम्भावना है। इसलिए इसके निर्माता बढ़ रहे हैं। प्रदेश का उद्योग विभाग भी इन्हें प्रोत्साहित कर रहा है।

जिले में सिहोरा के पास हरगढ़ और चरगवां में उमरिया डुंगरिया क्षेत्र के अलावा मनेरी औद्योगिक क्षेत्र में बड़ी इंडस्ट्री ने दस्तक दी है। इसलिए मध्यप्रदेश इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट कारपोरेशन (एमपीआइडीसी) ने निर्माण इकाइयों के लिए भूमि का आवंटन कर दिया है। अब अन्य अनुमतियां मिलने के बाद इकाइयों की स्थापना का काम शुरू हो जाएगा। निजी क्षेत्र की कंपनियां बड़ा निवेश कर रही हैं। हरगढ़ की खाली भूमि पर दो कंपनियों को जमीन आवंटित की गई है। एक को 10 हेक्टेयर भूमि का आवंटन किया गया है। इसमें 175 करोड़ रुपए का निवेश और 200 लोगों को रोजगार दिया जाएगा। दूसरी कंपनी सवा पांच हेक्टेयर भूमि पर 125 करोड़ की लागत से प्लांट लगा रही है। वह 60 लोगों को रोजगार देगी। उमरिया-डुंगरिया औद्योगिक क्षेत्र में आठ हेक्टेयर क्षेत्रफल में 175 करोड़ रुपए की लागत से बड़ा प्लांट लगाएगी। इसमें सवा सौ लोगों को रोजगार मिलेगा। मनेरी औद्योगिक क्षेत्र में पौने नौ हेक्टेयर में एक कंपनी ने 103 करोड़ रुपए का निवेश कर 130 लोगों को रोजगार देने का प्रस्ताव दिया है।

चार निवेशकों ने एथेनॉल की इंडस्ट्री लगाने में रुचि दिखाई थी। वे साढ़े पांच सौ करोड़ रुपए का निवेश कर रहे हैं। उन्हें भूखंडों का आवंटन कर दिया गया है। अब जरूरी अनुमतियां मिलने के बाद वे इनकी स्थापना का काम शुरू कर देंगी।
सीएस धुर्वे, कार्यकारी संचालक, एमपीआइडीसी जबलपुर