
balika rape
जबलपुर. संस्कारधानी में संस्कार गायब होते जा रहे हैं और अब यहां अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। हर दिन थानों में सैकड़ों अपराध दर्ज होते हैं और पुलिस कप्तान हर दिन पीसी कर वारदातों का खुलासा कर रहे हैं, लेकिन अपराध का ग्राफ नीचे आने की बजाया बढ़ता ही जा रहा है। रेप, डकैती, नकबजनी, अपहरण और हत्या के मामले हर दिन होने लगे हैं। लोग रात में घर से बाहर निकलने में असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। शनिवार को आए मासूम से बलात्कार मामले ने एक बार फिर रिश्तों को शर्मशार कर दिया है। मासूम से दुष्कर्म करने वाला रिश्ते का भाई है।
यह है मामला
बरेला थानांतर्गत 4 वर्षीय मासूम के साथ रिश्ते के भाई ने बलात्कार किया। पुलिस ने नाबालिग 17 वर्षीय किशोर को हिरासत में लेते हुए बलात्कार और पास्को एक्ट का मामला दर्ज किया है। मौके पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजीव उइके भी पहुंचे। किशोर और मासूम के अभिभावकों के बयान दर्ज कराए।
घर पर नहीं सुरक्षित बच्चे
जब घर पर ही बच्चे सुरक्षित नहीं हैं तो फिर पराए से क्या उम्मीद की जाए। कहीं रिश्तेदार बच्चों से नौकरों की तरह काम कराने का अपराध कर रहे हैं तो कहीं घर पर ही आपराधिक प्रवृत्ति के लोग रिश्तों का खून कर रहे हैं।
मनोचिकित्सक गुरमीत सिंह कहते हैं कि इस तरह के अपराध के लिए परिजन या माता-पिता भी जिम्मेदार हैं। बच्चों को माता-पिता का साथ चाहिए होता है, लेकिन अधिकांश माता-पिता केवल धन उपार्जन में ही लगे रहते हैं। बच्चे क्या कर रहे हैं, उनकी संगत कैसी है आदि बातों पर ध्यान नहीं देते हैं, जिसका परिणाम इस तरह के अपराध के रूप में परिलक्षित होते हैं।
समाजशास्त्री डॉ. सीएसएस ठाकुर कहते हैं कि वर्तमान समय में बच्चों को अभिभावकों का साथ बहुत कम समय के लिए मिलता है, जिससे वह स्वच्छन्द हो जाते हैं। वह मोबाइल, टीवी और दोस्तों के साथ अधिक समय बिताते हैं। किशोरावस्था में तेजी से शारीरिक और मानसिक विकास होता है। किशोरावस्था में रोक-टोक न हो तो अक्सर बच्चे गलत रास्ता चुन लेते हैं और फिर उनकी प्रवृत्ति भी वैसी ही होने लगती है।
Published on:
20 Jul 2019 05:00 pm

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