#Accidents जानलेवा बनी ट्रैफिक इंजीनियरिंग, खूनी सड़कों से झांक रहे हादसे
जबलपुर. शहर के भीतर कुछ ऐसे मार्ग हैं जिन्होंने न जाने कितनी माताओं की गोद को सूना किया, तो कितनी महिलाओं के मांग का सिंदूर मिटाया। यहां बार-बार हादसों में जानें जाती हैं लेकिन पुलिस पंचनामा तक सीमित है। आंकड़ों की मानें तो हर माह होने वाले हादसों में एक तिहाई इन पांच प्रमुख सडक़ों पर होते हैं।
सडक़ सुरक्षा समिति में दावे, काम नहीं
आश्चर्य की बात है कि सडक़ सुरक्षा समिति की बैठक में प्रशासन, नगर निगम, परिवहन विभाग और पीडब्ल्यूडी का अमला बड़े-बड़े दावे करते हैं लेकिन मैदानी हकीकत जस की तस है। हादसों की सडक़ें अब भी बार-बार खून से लाल हो रही हैं।
ट्रैफिक इंजीनियरिंग की नाकामी
रिटायर्ड पुलिस अधीक्षक अशाोक शुक्ला के अनुसार शहर के अधिकतर तिराहे-चौराहे ट्रैफिक इंजीनियरिंग को नजर अंदाज कर मनमाने ढंग से बनाए गए है। जहां आवश्यकता है, वहां ट्रैफिक सिग्नल नहीं है और जहां आवश्यकता नहीं है, वहां ट्रेफिक सिग्नल लगा दिए गए है। लेफ्ट टर्न के भी यही हाल है। ब्रेकर, चेतावनी बोर्ड नदारद हैं।
दमोहनाका से आइएसबीटी
ये हैं हादसों के प्वाइंट- कृषि उपज मंडी, अघोरीबाबा मंदिर मोड़, स्मार्ट सिटी मोड़, दीनदयाल चौक
यह है स्थिति- शहर की व्यस्ततम सडक़ है। यहां से रोजाना सैकड़ों ट्रक, मिनी ट्रक से लेकर हजारों चार पहिया और दुपहिया वाहन निकलते है। कृषि उपज मंडी मोड़ पर आए दिन हादसे, न तो यहां ब्रेकर हैं और न ही चेतावनी बोर्ड।
यह है स्थिति- अग्रसेन चौक और उखरी चौराहा, दोनों ही बेढंग़ी ट्रैफिक इंजीनियरिंग का नमूना। यहां सडक़ बनीं लेकिन न तो ब्लिंकर्स या ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए और न ही ब्रेकर बनाए गए। उखरी चौराहे पर हादसे में पूरा का पूरा परिवार खत्म हो चुका है, वहीं कई अन्य भी गंवा चुके जान।
प्रयास किए जा रहे है कि सडक़ हादसों की संख्या में कमी लाई जा सके। सभी एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
- प्रदीप शेन्डे, एएसपी, ट्रैफिक