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गजब का मास्टर प्लान, 7 प्रमुख सड़कों की जमीन पर बस गईं कॉलोनियां

शहर के विकास को गति देने के लिए आवश्यक है निर्माण

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Amazing master plan

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जबलपुर। शहर के विकास के लिए बनाए गए शुरुआती तीन मास्टर प्लान में 50 किमी लम्बी नई सपाट और चौड़ी सडक़ें बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया। तीसरे मास्टर प्लान की मियाद भी पूरी होने को है, लेकिन अभी तक उस पर अमल नहीं हुआ। आलम यह है कि प्रस्तावति सात सडक़ों की जमीन पर सघन बस्तियां बस गई हैं। शहर की मौजूदा सडक़ों पर यातायात का दबाव बढऩे के बाद भी नई सडक़ों के निर्माण के लिए जिम्मेदार जिला प्रशासन व नगर निगम ने पहल ही नहीं की। इस सम्बंध में जानकारों का कहना है कि शहर के व्यवस्थित विकास के लिए तैयार की गई विकास योजनाओं पर अमल नहीं होने से सडक़ों का निर्माण नहीं हो सका। नतीजतन वहां घनी बसाहट बस गई है।

यहां बस गई हैं बस्तियां
- महाराजपुर, सुहागी, रिछाई, मड़ई, बिलपुरा और मोहनिया के बीच बनने वाली 7.50 किमी लम्बी एमआर 1 सडक़ की जमीन पर
- कुदवारी-कठौंदा के बीच बनने वाली 3.32 किमी लम्बी एमआर 2 सडक़ की जमीन पर
- अधारताल में बनने वाली 2.38 किमी लम्बी लंबी एमआर-3 सडक़ के स्थान पर पर घनी बस्ती
- करमेता, माढ़ोताल और गोहलपुर के बीच बनने वाली महत्वाकांक्षी 4.16 किमी लम्बी एसआर 1 सडक़ की जमीन पर
- भड़पुरा, बिलपुरा, रांझी और मानेगांव के बीच बनने वाली 2.08 किमी लम्बी एसआर 7 सडक़ की जमीन पर
- रांझी, बिलपुरा और मोहनिया के बीच बनने वाली 2.19 किमी लम्बी एसआर 8 सडक़ की जमीन पर घनी बस्ती
- भड़पुरा, मड़ई, पिपरिया के बीच 3.57 किमी लम्बी एसआर 9 सडक़ की जमीन पर

ये है प्रक्रिया
मास्टर प्लान में शहर के भावी विकास के लिए मेजर सडक़ों के साथ सर्विस सडक़ों का भी निर्माण किया जाता है। प्रस्ताव के अनुसार यदि सडक़ का निर्माण जेडीए या हाउसिंग बोर्ड की विकास योजना में होता है तो अधिग्रहण के बाद जमीन उपलब्ध हो जाती है। लेकिन, जो प्रस्ताव इन निर्माण एजेंसियों के प्रस्ताव में शामिल नहीं होते उनके लिए समय पर जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाता। इससे वहां कॉलोनियों का निर्माण हो जाता है। प्रस्ताव दस्तावेजों म दम तोड़ देते हैं।

नगर के व्यवस्थित स्वरूप में विकास के लिए मास्टर प्लान बनाया जाता है। प्रस्तावों पर अमल के लिए समय अवधि भी तय की जाती है। शुरुआती तीनों मास्टर प्लान पर ठीक ढंग से अमल नहीं होने से 7 प्रस्तावित सडक़ों की जमीन पर बसाहट बस गई है।
- इंजी. संजय वर्मा, स्ट्रक्चर इंजीनियर व टाउन प्लानर