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गजब है… मौत के 5 घंटे बाद जिंदा हुआ ये शख्स, यूं सुनाई यमराज के दरबार की कहानी!

आंखें खोलते ही बताया कि ऊपर क्या-क्या हुआ..?

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maut ka rahasya

अर्थी में लेटते ही जीवित हो गया आदमी

जबलपुर। जो दुनिया मेंं आया है। उसे एक न एक दिन जाना ही पड़ेगा..? इस कटु सत्य को तो सभी मानते हैं, लेकिन मौत के बाद व्यक्ति की आत्मा आखिर कहां जाती है? इसको लेकर धर्मशास्त्रों और आधुनिक विज्ञान में मतभेद है। वैज्ञानिक गण धर्म को केवल व्यक्ति आस्था का विषय मानते हैं, लेकिन जब-तब कई ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं, जो वेद-शास्त्रों और पुराणों में लिखी वादों के वैज्ञानिक आधार को बल प्रदान करती हैं। ऐसा ही एक वाकया सिहोरा तहसील के ग्राम बरगवां में हुआ। यहां एक व्यक्ति मौत के करीब पांच घटे बाद अचानक जीवित हो गया। इसके बाद उसने मौत की यात्रा की जो कहानी सुनाई वह न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि गरुण पुराण में लिखी गई बातों को पुष्ट भी करती है। यह घटना दीपावली के छठवें दिन यानी सूर्य षष्ठी को हुई थी। मंगलवार को सूर्य षष्ठी का पर्व है। आइए इस उपलक्ष्य में आपको भी उस रोचक और सत्य घटना से अवगत कराते हैं।

ऐसे हुई घटना
सिहोरा से महज 7 किलोमीटर दूर पश्चिम में बसे बरगवां ग्राम निवासी महेश प्रसाद पटेल ने बताया कि यहां मुन्नीलाल दाहिया ग्राम कोटवार का काम करते थे। महेश प्रसाद स्वयं ग्राम पटेल माने जाते थे। दीपावली के बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष की छठवीं तिथि को सुबह मुन्नीलाल कोटवार को अचानक न जाने क्या हुआ कि वह आंगन में बैठे-बैठे लुढक़ गए। परिजनों व ग्रामीणों ने वैद्य के बाद डॉक्टर को भी दिखाया तो पता चला कि मुन्नीलाल की नब्ज थम चुकी है। उनके प्राण निकल चुके हैं। इसके बाद लोगों ने मुन्नीलाल के अंतिम संस्कार की तैयार कर ली।

अचानक हुई हलचल
ग्राम के भैयाजी पटेल ने बताया कि मुन्नीलाल को श्मशान भूमि में ले जाने के लिए अर्थी तैयार हो चुकी थी। लोग जैसे ही मुन्नीलाल की मृत देह को उठाने पहुंचे वैसे ही उनके शरीर में अचानक हलचल हुई। लोग हैरान रह गए। गांव के बुजुर्गों ने मुन्नीलाल के चेहरे पर गंगाजल की बूंदें छिडक़ीं तो उन्होंने आंखें खोल दीं। गम का माहौल तत्काल खुशी में बदल गया।

हाथों में कोयला व हल्दी
ग्रामीणों ने बताया कि चेहरे पर पानी डाले जाने के बाद मुन्नीलाल को पीने के लिए पानी दिया गया। पानी पीते ही मुन्नी लाल उठकर बैठ गए। उन्होंने अपने हाथों की मु_ी खोली तो उनमें कोयला व हल्दी की गांठें निकलीं। लोग उसे देख हैरान रह गए। मुन्नीलाल ने बताया कि ये गांठें उन्हें यमदूत ने दी हैं और वापस भेज दिया है। इसके बाद मुन्नीलाल ने जो कहानी सुनाई उसे सुनकर लोग हैरान रह गए।

ये सुनाई रोचक कहानी
ग्रामीणों के अनुसार मुन्नीलाल कोटवार ने बताया कि दो यमदूत उनके पास आए। उन्होंने एक डंडे से उन पर प्रहार किया। उसके बाद वे उन्हें अपने साथ पकडकऱ कहीं ले गए। वे मुन्नीलाल को एक दरबार में लेकर पहुंचे जहां मुकुट लगाए हुए कोई राजा जैसा बैठा हुआ था। राजा के पास कई कर्मचारी व यमदूत खड़े थे। उन्होंने देखते ही बोल दिया कि तुम गलत व्यक्ति को पकडकऱ ले आए हो। इसकी अभी मौत नहीं आई है। इसके बाद यमदूतों ने आपस में कुछ बात की और मेरी मु_ियों में कुछ रखकर मुझे आसमान से नीचे की तरफ छोड़ दिया। इसके बाद क्या हुआ मुझे कुछ नहीं मालूम। मुझे तो आश्चर्य हो रहा है कि घर में इतनी भीड़ क्यों लगी है। लोगों ने मुन्नीलाल को हकीकत बतायी और कहा कि तुम्हारी मौत हो चुकी थी। हम लोग तुम्हें श्मशान घाट ले जाने वाले थे। लेकिन तुम अचानक उठकर बैठ गए। यानी मुन्नीलाल मौत के करीब पांच घंटे बाद फिर जीवित हो गए। उनके साथ हुई यह सच्ची घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय है।

और भी घटनाएं
इस तरह की और भी घटनाएं हैं जो मृत्यु के बाद की यात्रा और सच की साक्षी हैं। बताया गया है कि कुछ दिन पहले अलीगढ़ के अतरौली में किरथल गांव निवासी रामकिशोर का निधन हो गया। रामकिशोर की मौत के बाद रिश्तेदारों को खबर कर दी गई और घर पर लोगों का हुजूम जमा होने लगा। परिवार वालों ने रामकिशोर के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू कर दी, लेकिन इस दौरान मृतक के शरीर में हलचल हुई। इसे देखकर वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह गए, इसी दौरान अचानक रामकिशोर उठकर बैठ गए और कहा कि अब वह एकदम ठीक हैं, गलती से मुझे ले गए थे, अब वापस भेज दिया है।

राम किशोर की जुबानी
लोगों ने जब रामकिशोर से पूछा कि उन्हें 5 घंटों के बारे में क्या पता है तो उन्होंने कहा कि ज्यादा याद नहीं है लेकिन जहां गया था वहा एक बैठक चल रही थी और कुछ दाढ़ी वाले महात्मा अपने प्रमुख से बारी-बारी बातें कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस दौरान सबसे बुजुर्ग महात्मा ने उनके बारे में कई सवाल किए और पूछा कि इसे क्यों लाए हो, इसे ले जाओ, अभी समय है। रामकिशन ने बताया कि इसके तुरंत बाद उन्हें एक झटका सा लगा और जब आंखें खुली तो घर पर रोते-बिलखते परिवार वालों को देखा। अब पता चल रहा है कि वास्तव में वह तो मर गए थे। ईश्वर की कृपा से नया जीवनदान मिला है।

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