जी, पुरी साहब मुझे लाड़ से पंडित जी कहते थे। पुरी साहब बोले ..मेरे लिए किन शब्दों में कहा गया ये महत्वपूर्ण नहीं होता, क्या कहा गया ये महत्वपूर्ण होता है, इसलिए कैसे कहना है ये अपने आप आ जाता है। भाव एक्टर का वार होता है, जो भाषा रूपी घोड़े पर सवार होता है। बोले दुनिया सिर्फ वार को और सवार को ही याद रखती है।