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जबलपुर. औषधीय खेती को बढ़ावा देने, किसानों और संग्राहकों को औषधीय उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए जबलपुर के विशेषज्ञ प्रदेशभर में कार्य करेंगे। राज्य वन अनुसंधान संस्थान की टीम विभिन्न जिलो में उगाई जाने वाली औषधीय उपज की गुणवत्ता प्रमाणित करेगी। इससे इनके निर्यात का रास्ता भी खुलेगा।
शहर के विशेषज्ञ निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका
प्रदेश में कराएंगे औषधीय पौधों की खेती
क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया और एसएफआरआई की संयुक्त टीम करेगी कार्य
क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) और राज्य वन अनुसंधान संस्थान के आरसीएफसी सेंटर के विशेषज्ञों की टीम ने औषधीय खेती के लिए एक साथ कार्य करने का निर्णय किया है। पंजीकृत किसानों के खेत में रोपणी, कटाई, पैकिंग आदि कार्य टीम की निगरानी में होंगे। टीम के सदस्य ही औषधीय उपज की गुणवत्ता भी प्रमाणित करेंगे।
खेती का रकबा बढ़ा
संस्थान में आरसीएफसी सेंटर खुलने के बाद जबलपुर सहित आसपास के किसानों को तकनीकी मदद मिलने से औषधीय खेती का रकबा बढ़ रहा है। मार्केटिंग के नए प्लेटफॉर्म तैयार हो रहे हैं। 24 नवम्बर 2019 को राज्य वन अनुसंधान संस्थान में क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के कार्यक्रम के बाद प्रमाणीकरण का कार्य करने पर सहमति बनी थी। किसानों और संग्राहकों की उपज की ग्रेडिंग के अनुसार एजेंसियां रेट तय करती हैं। औषधीय पौधों की खेती में प्राकृतिक खाद का उपयोग करने से उसमें आवश्यक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिलेंगे।
नई दिल्ली में बैठक में हुआ निर्णय
नई दिल्ली में दो जनवरी को आयोजित उच्च स्तरीय तकनीकी बैठक में औषधीय पौधों की खेती और गुणवत्ता बढ़ाने पर मंथन हुआ। इसमें क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया, नेशनल मेडिशनल प्लांट्स बोर्ड, देश के प्रमुख रिसर्च संस्थानों के प्रतिनिधि, प्रगतिशील किसान एवं औषधियों से उत्पाद बनाने वाले कम्पनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक मेें शामिल राज्य वन अनुसंधान संस्थान के डायरेक्टर गिरिधर राव ने बताया कि पहले चरण में मप्र में क्यूसीआई के साथ कार्य करने का निर्णय हुआ है। अगले चरण में छत्तीसगढ़ के किसानों को जागरूक करने और औषधीय उपज की गुणवत्ता बढ़ाने पर कार्य किया जाएगा।
Published on:
04 Jan 2020 10:18 am

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