
Big News : NEET-2019 eligibility is not necessary for AYUSH course in Rajasthan
जबलपुर. आयुष डॉक्टर एलोपैथी दवा नहीं लिख सकेंगे। नेशनल कमीशन फॉर इंडियन मेडिसिन (एनसीआईएसएम) बिल 2019 ने आयुष डॉक्टरों के लिए केंद्रीय स्तर पर एलोपैथी में प्रेक्टिस की छूट देने की सम्भावना को समाप्त कर दिया। केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तुत बिल में आयुष डॉक्टरों को एलोपैथी प्रेक्टिस का अधिकार दिए जाने से मरीजों को नुकसान की आशंका जताई गई है। बिल के प्रावधानों से प्रदेश के करीब चालीस हजार आयुष चिकित्सकों को झटका लगा है। आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी के चिकित्सक बिल में इमरजेंसी के दौरान एलोपैथी दवा लिखने की छूट मिलने के प्रावधान की उम्मीद लगाए बैठे थे।
बिल में तर्क
बिल में प्रावधान को लेकर तर्क दिया गया है कि भारतीय चिकित्सा पद्धति की वैज्ञानिकता एवं विश्वसनीयता के साथ स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक उन्नतियों के साथ एकीकृत कर त्वरित रूप से बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसके लिए विज्ञान आधारित दृष्टिकोण बढ़ाना जरूरी है।
गम्भीर स्थिति में बचा सकेंगे जान
आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राकेश पांडे के अनुसार ग्रामीण अंचलों में जहां एमबीबीएस चिकित्सक नहीं है। वहां आकस्मिक स्थिति में कुछ एलोपैथी दवा मिलने की अनुमति से आयुष चिकित्सक मरीज की जीवन रक्षा करने की स्थिति में होते। इसे लेकर नीति योग के सामने एसोसिएशन पक्ष प्रस्तुत करेगा। उन्हें अवगत कराया जाएगा कि विशेष ट्रेनिंग के बाद ही आयुष चिकित्सकों को एलोपैथी दवा लिखने का अधिकार होगा। वह मरीज की स्थिति गम्भीर होने पर ही दवा प्रिस्क्राइब कर सकेंगे।
अब केंद्रीय स्तर पर आयुष डॉक्टरों को एलोपैथिक प्रैक्टिस अधिकार मिलने की सम्भावना फिलहाल समाप्त है। इस एक्ट के पारित होने के बाद भारतीय चिकित्सा शिक्षा व प्रैक्टिस में गुणात्मक सुधार होंगे।
डॉ. मदनगोपाल वाजपेयी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आयुष मेडिकल एसोसिएशन
Published on:
02 Dec 2019 08:48 am
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