
MP News: मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में दूषित पानी को लेकर सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के गौरीघाट में सीवेज का पानी नर्मदा में मिलने के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद गुरुवार सुबह ही नगर निगम का अमला मशीनरी के साथ गौरीघाट पहुंच गया। सुपर सकर मशीनों से नावघाट के समीप उस टैंक की सफाई शुरू की गई, जिससे ऊपर एसटीपी प्लांट में ट्रीटमेंट के लिए पानी जाता है। 5 घंटे से ज्यादा सफाई चली।
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने पोस्ट में लिखा था कि नर्मदा में मिलने वाले सीवेज का पानी ही 500 मीटर दूर ललपुर प्लांट से सप्लाई होता है। इससे कोई बड़ी घटना हो सकती है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि 8 महीने से एसटीपी प्लांट बंद है, इसके कारण नालों का दूषित पानी सीधे नर्मदा में मिल रहा है। इस प्लांट में पहले भी तकनीकी खराबी के कारण राजनीतिक घमासान होता रहा है।
नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा ने आरोप लगाया निगम ने 42 करोड़ की लागत से एसटीपी प्लंाट लगाए लेकिन कई बंद पड़े हैं। एसटीपी. के प्लांट निरीक्षण के दौरान नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा, उपनेता प्रतिपक्ष शगुफ्ता उस्मानी गुड्डू नबी, सचेतक अयोध्या तिवारी, पार्षद संतोष दुबे पंडा, अभिषेक मिश्रा मौजूद थे।
इधर, निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने भी एसटीपी प्लांट का निरीक्षण किया। उन्होंने दावा किया कि प्लांट में शुद्धिकरण के बाद ही नदी में पानी छोड़ा जा रहा है। इस दौरान मौके पर ही पानी के सैंपल इक_े कराकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजने निर्देशित किया।
नर्मदा में दूषित पानी मिलने पर लगातार सियासत होती रही है। महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने चुनाव घोषणा पत्र में भी इसे शामिल किया था कि वे पहली फाइल नर्मदा में दूषित पानी मिलने से रोकने की साइन करेंगे। इसके बाद नर्मदा में नालों का दूषित पानी मिलने से रोकने के लिए 6 एसटीपी प्लांट स्थापित किए गए थे।
Updated on:
09 Jan 2026 09:59 am
Published on:
09 Jan 2026 09:53 am
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