बाल संप्रेक्षण गृह के बच्चों के द्वारा बनाई गई चीजों की लगी जिला अदालत परिसर में एग्जिबीशियन, दिवाली पर बनाए आकर्षक दिये, डेकोरेटिव आइटम
जबलपुर. बचपन वैसे खेलने कूदने का होता है, लेकिन कुछ बच्चों का जीवन इन सब से परे अपराध की दुनिया की ओर ले जाता है। उन्हें दोबारा समाज की मुख्य धारा से जोडऩे के लिए बाल संप्रेक्षण गृह और बाल गृह द्वारा नवाचार किया जा रहा है। जिसके तहत उन्हें पढ़ाई, लिखाई कराने के साथ-साथ कला और कलाकारी भी सिखाई जा रही है। दिवाली के अवसर पर उनके द्वारा बनाए गए उत्पादों की बिक्री के लिए जिला अदालत परिसर में गुरुवार को प्रदर्शनी लगाई गई। जिसे देखने पहुंचे न्यायाधीशों व अधिवक्ताओं ने उन्हें हाथों हाथ खरीद भी लिया।
न्यायाधीश ने किया शुभारंभ, सामान भी खरीदा
जिला अदालत परिसर के विधिक सेवा प्राधिकरण हॉल में बाल संप्रेक्षण गृह एवं बाल गृह के बच्चों द्वारा बनाए गए दीये, पूजन थाली, डेकोरेटिव आइटम्स की प्रदर्शनी का शुभारंभ न्यायाधीश आलोक अवस्थी ने दीप प्रज्जवलन से किया। उन्होंने बच्चों की कलाकारी की सराहना करते हुए प्रशिक्षकों व स्टाफ के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा इन प्रयासों से समाज से कट चुके बच्चे दोबारा मुख्य धारा में लौट रहे हैं, यह खुशी की बात है। बच्चों को अपराध की दुनिया से बाहर निकालने में लगे सभी अधिकारी, जनसेवक व सदस्यों की मेहनत से ही ये संभव हो पा रहा है। प्रदर्शनी में जो सामान बच्चों ने बनाया वह इतना आकर्षक था कि कुछ ही घंटों में पूरा सामान न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं व अन्य लोगों ने खरीद लिया।
प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट मंजू सिंह ने बताया बाल संप्रेक्षण गृह एवं बाल गृह में रह रहे बच्चों को रोजगारोन्मुखी अवसर और उनके मन से अपराध बोध को खत्म कर दोबारा सामान्य जीवन जीने की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से दीपावली पर्व को दृष्टिगत रखते हुए आकर्षक एवं कलात्मक पूजा चौकी, टी कोस्टर, शुभ-लाभ, लाईट बॉटल, दीये आदि सामग्री का निर्माण कराया गया था। जिन्हें जिला अदालत परिसर में उपस्थित गणमान्य लोगों ने खूब सराहा। इस दौरान सचिव उमाशंकर अग्रवाल, जेजे बोर्ड मेंबर नीतू पांडे, रितु शर्मा, संप्रेक्षण गृह अधीक्षक माधुरी रजक, बालगृह अधीक्षक प्रीति साहू, हमीद खान, मेंटर अनुज शर्मा आदि का सहयोग रहा।