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यहां हाजिरी लगाए बगैर आगे नहीं बढ़ते हैं वाहन और दूल्हा-दुल्हन

वाहन चालक माता को याद करते हुए इस मार्ग से गुजरते हैं। मंदिर के सामने से गुजरने पर दो मिनट के लिए ही सही लेकिन हर वाहन चालक यहां हाजिरी देने के बाद ही आगे बढ़ता है। पुजारी तुलसी राम दुबे का मानना है कि मन का भय दूर करने में माता सहायक हैं।    

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यहां हाजिरी लगाए बगैर आगे नहीं बढ़ते हैं वाहन और दूल्हा-दुल्हन

यहां हाजिरी लगाए बगैर आगे नहीं बढ़ते हैं वाहन और दूल्हा-दुल्हन

जबलपुर. मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में बंजारी माता का ऐसा स्थान हैं, जहां से आगे बढऩे से पहले हर वाहन चालक माता के यहां हाजरी लगाता है, यही नहीं नवविवाहित दूल्हा-दुल्हन भी पहले माता का आर्शीवाद लेते हैं, उसके बाद भी इस मार्ग से आगे बढ़ते हैं, यह परंपरा सालों से चली आ रही है। चूकि यह इलाका जंगल और खाई से पटा हुआ है, ऐसे में हर कोई माता को याद करते हुए निकलता है, क्योंकि लोगों की आस्था है कि माता का आर्शीवाद रहेगा तो कोई संकट सामने नहीं आएगा।

माता रानी के जितने मंदिर उतनी कहानियां हैं, एक ऐसा ही मंदिर है जबलपुर सिवनी के बीच छपारा तहसील के गोपालगंज में, जिसे बंजारी माता का मंदिर कहते हैं। इसकी स्थापना को लेकर कोई पुख्ता जानकारी नहीं है, लेकिन ऐसा कहा जाता है कि इसकी बंजारों द्वारा स्थापना की गई थी। चूंकि ये रास्ता जंगल के बीच पड़ता था, गहरी खाईयों वाला रास्ता होता था, ऐसे में स्वयं के भय को दूर करने और लोगों को जंगली पशुओं से बचाने के उद्देश्य से बंजारों ने एक अनगढ़ देवी प्रतिमा की स्थापना की थी। जो हर आने जाने वाले के लिए आस्था का केन्द्र बन गई है।

गहरी खाई, खतरनाक मोड़ और घने जंगल से भरी है ये डगर

जबलपुर से नागपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट जाने वाले यात्रियों को इसी मार्ग से होकर गुजरना पड़ता है। जबलपुर से बाहर निकलते ही गहरी खाई, खतरनाक मोड सहित जंगल पड़ता है, वहीं सिवनी की ओर से आने पर भी ऐसे ही रास्ते पड़ते हैं। तब वाहन चालक माता को याद करते हुए इस मार्ग से गुजरते हैं। मंदिर के सामने से गुजरने पर दो मिनट के लिए ही सही लेकिन हर वाहन चालक यहां हाजिरी देने के बाद ही आगे बढ़ता है। पुजारी तुलसी राम दुबे का मानना है कि मन का भय दूर करने में माता सहायक हैं। इसीलिए हर साल हजारों लोग दर्शन के लिए आते हैं। बंजारों की स्थापना का समय तो किसी को ज्ञात नहीं, लेकिन इस मंदिर को बने एक सदी से ज्यादा हो गया है।

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नवयुगल को दर्शन कराना नहीं भूलते
यहां से गुजरने वाले दुल्हा-दुल्हन और इस क्षेत्र के नवयुगल माता का आर्शीवाद लिए बगैर यहां से नहीं निकलते हैं, यहां परिजन अपने बच्चों के लिए मन्नतें मांगते हैं, क्षेत्र सहित दूर दराज से नवरात्रि में काफी संख्या में श्रद्धालु माता का दर्शन पूजन करने के लिए पहुंचते हैं।

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