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फर्जीवाड़ा: बैंक अधिकारी को बिल्डर ने साधा, सरकार को लगाया चूना

फर्जीवाड़ा: बैंक अधिकारी को बिल्डर ने साधा, सरकार को लगाया चूना  

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जबलपुर। बैंक अधिकारियों ने बिल्डर के साथ मिलकर क्रेडिट लिमिट पर बंधक रखी 1.07 करोड़ की सम्पत्ति को महज 79.55 लाख में बेच डाला। बैंक अधिकारियों ने कलेक्टर गाइडलाइन को दरकिनार कर ढाई हजार वर्गमीटर वाली जमीन को दो हजार और 1500 रुपए प्रति वर्गमीटर की दर से बेच दिया। ये प्लॉट छोटी लाइन से मेडिकल कॉलेज मुख्य मार्ग पर हैं। 29 लाख 48 हजार के आर्थिक नुकसान को लेकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (इओडब्ल्यू) ने नेपियर टाउन स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में शाखा प्रबंधक रहे वीके मिश्रा, बैंक में प्राधिकृत अधिकारी टीएन कुमार, विधि अधिकारी पीके मुइले, चीफ मैनेजर एके कोठीवाल, निविदाकर्ता आलोक मिश्रा और राजकुमार साहू, रेवा बिल्डर व अन्य के खिलाफ 18 सितम्बर 2018 को धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120 बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का प्रकरण दर्ज किया है।

news facts-

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने दर्ज किया प्रकरण
बिल्डर से मिलीभगत कर बैंक अधिकारियों ने 1.07 करोड़ की प्रॉपर्टी 79.55 लाख में बेची

इओडब्ल्यू में रिलायबल कंस्ट्रक्शन कंपनी के मदन भाटिया ने शिकायत कर बताया कि नेपियर टाउन स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में उसका खाता 5008 है। खाता में बैंक गारंटी और कैश क्रेडिट लिमिट है। कैश क्रेडिट लिमिट के लिए उसने अपना मदनमहल का ऑफिस, मदनमहल की एक दुकान और सदर काफी हाउस के प्रथम तल को गिरवी रखा था। वर्ष 2000 में बैंक द्वारा लिमिट और बैंक गारंटी को स्थगित करते हुए भुगतान बंद कर दिया गया था। इसके बाद फर्म के खिलाफ लगभग एक करोड़ 17 लाख रुपए जमा करने के आदेश पारित हुए था। फरवरी 2004 में फर्म रिलायबल कंस्ट्रक्शन कंपनी और बैंक के बीच किस्तों में 90 लाख जमा कराने का समझौता हुआ। इस समझौते के अनुसार रुपए जमा होने के बाद भी बैंक द्वारा 25 अक्टूबर 2007 को राजीनामा निरस्त कर दिया गया। अचल संपत्ति की नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी।

अप्रैल 2009 में मदनमहल वाली प्रॉपर्टी की न्यूनतम मूल्य 79 लाख 55 हजार निर्धारित की गई। आमंत्रित निविदा में निविदाकार बिल्डरों ने एक करोड़ सात लाख निविदा प्रस्तुत की थी। अधिकारी और बिल्डरों ने सांठगांठ कर इस निविदा को निरस्त करते हुए दूसरी निविदा बुलाकर प्रॉपर्टी 79 लाख 55 हजार 555 में निविदाकर्ता आलोक मिश्रा को बेच दी। बैंक अधिकारी और बिल्डर ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर बेशकीमती कमर्शियल प्रॉपर्टी को रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी घोषित कर दिया। जिससे उसकी कलेक्टर गाइडलाइन में कीमत कम हो गई। जबकि वर्ष 2009-10 में कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार मेडिकल रोड की कीमत ढाई हजार वर्गमीटर थी। स्टॉम्प ड्यूटी भी 1.07 करोड़ के आधार पर पंजीयक ने जमा कराए 22 अक्टूबर 2009 को बैंक ने सेल लेटर जारी किया।