20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

फर्जी नोटरी बनकर सहायक आयकर आयुक्त के शपथ पत्र पर लगाई मोहर

जबलपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र में जालसाजों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज  

2 min read
Google source verification
Rajasthan police: 12 निरीक्षकों के तबादले, आखिर यातायात शाखा को मिले दो सीआइ

Rajasthan police: 12 निरीक्षकों के तबादले, आखिर यातायात शाखा को मिले दो सीआइ

जबलपुर। बलदेवबाग स्थित एक ऑनलाइन रजिस्ट्री एवं सेवा प्रदाता में जालसाज फर्जी नोटरी कर रहे है। ये फर्जीवाड़ा लखनऊ कोर्ट में पेश दस्तावेज से हुआ है। जबलपुर शहर के रहने वाले सहायक आयकर आयुक्तने घरेलू हिंसा के मामले में कोर्ट में शपथ पत्र प्रस्तुत किया। बलदेवबाग से आयकर आयुक्तने नोटराइज कराया। इस पर जालसाजों ने फर्जी सील-साइन कर नोटराइज पत्र जारी कर दिया। ये फर्जीवाड़ा कोर्ट में पकड़े जाने के बाद आयकर अधिकारी ने कोतवाली थाने में जालसाजों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कराया। कोतवाली पुलिस के अनुसर गांधीगंज निवासी प्रियंक जैन अभी मुंबई स्थित अंतर्राष्ट्रीय कराधन सर्किल-2 में सहायक आयकर आयुक्त हैं। उनका लखनऊ निवासी पत्नी के साथ घरेलू हिंसा का प्रकरण न्यायालय में है। इसी प्रकरण में लखनऊ कोर्ट में अपनी आय एवं अन्य जानकारियों का शपथ पत्र प्रस्तुत करना था। इसके लिए 28 अगस्त को बलदेवबाग स्थित एसआर ऑनलाइन रजिस्ट्री एवं सेवा प्रदाता (आरएस प्रॉपर्टीज) से शपथ पत्र बनवाया था। इसे कोर्ट में पेश करने पर पत्नी के अधिवक्ता ने शपथ पत्र की वैधानिकता को चुनौती दी। इसकी छानबीन की गई तो फर्जीवाड़ा सामने आया।
यह है स्थिति
- 28 अगस्त, 2021 को बलदेवबाग से शपथ पत्र की प्रक्रिया हुई।
- 2 सितंबर, 2021 को नोटराइज शपत्र पत्र बनाकर दिया गया था।
- 29 अक्टूबर, 2021 को लखनऊ कोर्ट में वैधानिकता को चुनौती।
- 6 दिसंबर, 2021 को कोतवाली थाना में प्रकरण दर्ज हुआ।

शिकायत में कहा गया है
आयकर अधिकारी के अनुसार आरएस ऑनलाइन में नोटराइज पत्र के लिए प्रोपाइटर सुमित जैन ने स्टाम्प पेपर उपलब्ध कराया था। इसके लिए ममता जैन अधिकृत है, जो सुमित की मां है। सुमित ने दुकान में बैठने वाले आनंद मोहन चौधरी से परिचय कराया था कि वे नोटरी का काम करते है। उस दिन आनंद मोहन ने स्टाम्प पर टिकट लगाया। दिनांक, नाम और नोटरी की मुहर लगाई थी। रजिस्टर में हस्ताक्षर भी कराए थे। प्रियंक के भाई मयंक के अनुसार आरएस ऑनलाइन कार्यालय में जाने पर पता चला कि वहां आनंद मोहन के नाम से प्रतीक जैन नोटराइज का काम करता है। इसके एवज में आनंद मोहन को प्रति माह 10 हजार रुपए भुगतान करता है। बदले में आनंद मोहन उसे अपना नाम एवं मोहर का उपयोग करने देता है। आयकर अधिकारी प्रियंक जैन की शिकायत पर पुलिस ने आरएस प्रॉपर्टीज के प्रोप्राइटर सुमित जैन, आनंद मोहन चौधरी और प्रतीक जैन के विरुद्ध कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और फर्जीवाड़े का प्रकरण दर्ज किया है।