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संगीनों के साए में हुआ भाई बहन का मिलन- देखें वीडियो

दूज के पूजन के बाद बहनों ने अपने भाईयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र के लिए प्रार्थना की।  

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bhai dooj significance and history hindi me

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जबलपुर। होली के बाद भाईदूज का त्यौहार शहर में जगह-जगह मनाया गया। दूज के पूजन के बाद बहनों ने अपने भाईयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र के लिए प्रार्थना की। इस दौरान केंद्रीय कारागार में भी बहनें अपने भाईयों को तिलक लगाने पहुंची। कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच बहनों को परिजनों सहित जेल में कैद उनके भाईयों से मिलने दिया गया।

जेल में रही भीड़
शनिवार को सुबह से ही जेलों में भीड़ रही, इस दिन जेल में बंद भाइयों की बहनें उन्हें तिलक करने विभिन्न जगहों से जेल तक आईं। हर साल मनाई जाने वाली परंपरा के तहत हर बार यहां दोपहर के समय जेल की बाहर की सड़क पर जाम की स्थिति पैदा हो जाती है। इस बार भी विभिन्न जिलों से अपने भाइयों को मिलने आने वाली बहनों के चलते यहां यातायात प्रभावित होने की स्थिति बनी।

भाई दूज के मौके पर शनिवार को जिला जेल पर बंद भाईयों से मिलने बहनों की जबरदस्त भीड़ उमडी। कड़ी सुरक्षा के बीच सहूलियत के साथ बहनों की भाईयों से मिलाई कराई जा रही है। इस दौरान जेल के वरिष्ठ अधिकारी व्यवस्था को देख रहे हैं, ताकि त्योहार पर किसी भी बहन को बगैर मुलाकात वापस निराश होकर नहीं जाने दिया जाएगा।

ऐसी है परंपरा
होली की परमा के बाद दूज का त्यौहार मनाया जाता है। बुंदेलखंडी परंपरा के अनुसार गोबर के दूज बनाकर बहनें अपने भाईयों की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं। पूजन का दृश्य अति आकर्षक होता है। इस अवसर पर गोबर के बने दूज के साथ एक दुश्मन भी बनाया जाता है जिसे रंग गुलाल लगाकर मूसल से जमकर उसकी पिटाई की जाती है।

बताया जाता है कि पूजन के बाद ही बहनें अपने भाईयों को तिलक लगाती हैं। इससे उनकी भाईयों की आयु लंबी होती है और यम का भय नहीं रहता। यह परंपरा बुंदेलखंड में बरसों पुरानी है। इसे यम और यमुना की कथा को भी जोड़कर देखा जाता है।