19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भीम की गदा से बना था यह कुंड, कोई नहीं नाप सका गहराई

महाभारत के पांच पांडवों ने काटा था यहां अज्ञातवास, इसका पानी है निर्मल, कई अनोखे जीव हैं यहां

3 min read
Google source verification

image

Ajay Khare

Mar 26, 2016

bheemkund

bheemkund

अजय खरे। महाभारत के पांच पांडवों और द्रोपदी का बुंदेलखंड से गहरा रिश्ता रहा है। कहा जाता है कि उन्होंने अपने अज्ञातवास का कुछ समय इस क्षेत्र में बिताया था। जिस जगह उनके रहने के प्रमाण मिलते हैं वह छतरपुर जिले में भीमकुंड के नाम से जाना जाता है। यह जिला मुख्यालय छतरपुर से करीब 80 किमी दूर सघन वनों के बीच बाजना कस्बा के पास है। पर्यटन प्रेमियों के लिए यह एक रमणीक जबकि इतिहास और प्रकृति पर शोध करने वालों के लिए यह रहस्मयी स्थान है।

bheemkund

भीम के गदा के प्रहार से बना भीमकुंड
चारों ओर से कई प्रकार की दुर्लभ वनस्पतियों और वृक्षों से आच्छादित भीमकुंड के बारे में कहा जाता है कि यह भीम के गदा के प्रहार से अस्तित्व में आया था। जनश्रुतियों के अनुसार अज्ञातवास के समय जंगल में विचरण के समय द्रोपदी को प्यास लगी तो उन्होंने भीम से पानी लाने को कहा। भीम ने वहां एक स्थान पर अपनी गदा से पूरी ताकत से प्रहार किया तो वहां पाताली कुंड निर्मित हुआ और अथाह जल राशि नजर आई जिसके बाद से इसका नाम भीमकुंड हो गया।

bheemkund

चट्टानों के बीच से नजर आता है आसमान
यहां चट्टानों के बीच निर्मित प्राकृतिक गुफाएं पांडवों के रहने का प्रमाण देती हैं। अंदर से देखने पर ऊपर चट्टानों के बीच से आसमान गोलाकार नजर आता है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे यहां की चट्टानों की छत को किसी ने गोल आकार के रूप में काटा है। जहां चट्टानों के बीच गोलाकार विशाल छेद है उसे ही भीम की गदा के प्रहार से निर्मित माना जाता है। इस स्थान की खासियत यह है कि यहां जोर से बोलने पर ईको साउंड निर्मित होता है।

bheemkund






















ऐसा नील-निर्मल नीर शायद कहीं और नहीं
कुंड के जल की खासियत यह है कि यह अत्यंत निर्मल और नीले रंग का व पारदर्शी है। जिसकी वजह से कुंड की काफी गहराई तक अंदर तक की चीजें नजर आती हैं। कहा जाता है कि इसका पानी हिमालय के पानी जैसी गुणवत्ता वाला मिनरल वाटर है। लोग इसका जल बोतलों में भरकर अपने साथ ले जाते हैं।

jabalpur bheemkund

नहीं नापी जा सकी कुंड की गहराई
भीम कुंड की गहराई आज भी रहस्मय बनी हुई है। आज तक इसकी गहराई कोई नहीं नाप सका। कई लोगों ने कई तरह से इसकी गहराई नापने का प्रयास किया पर असफल रहे। माना जाता है कि जहां कुंड है वह जमीन के अंदर से प्रवाहित प्रबल जलधारा के कारण बना है पर इस बारे में आज तक कोई भू-जल वैज्ञानिक यह पता नहीं कर सका कि आखिर यह जलधारा किस जल स्रोत से जुड़ी है।

सुनामी के समय उठी थी ऊंची लहरें
अपने आप में अद्भुत यह रहस्मयी कुंड कई कारणों से लोगों की जिज्ञासा और शोध का केंद्र रहा है। सुनामी आपदा के समय इस कुंड में करीब 80 फीट तक ऊंची लहरें उठी थीं। जिसके बाद से यह देश- विदेश की मीडिया की सुर्खियां बना था। यदि किवदंतियों को सही माना जाए तो कुंड से निकली जलधारा अंदर ही अंदर संगम में जाकर मिलती है। कहा जाता है कि वर्षों पहले किसी ने इसका रहस्य जानने के लिए कोई वस्तु इसमें डाली थी जो संगम में मिली थी।


डिस्कवरी चैनल की टीम ने की थी पड़ताल
सुनामी के समय इसमें लहरें उठने के बाद डिस्कवरी चैनल की टीम इसका रहस्य जानने आई थी। उनके गोताखोरों ने कई बार इसके कुंड में गोता लगाए थे पर वे न तो इसकी गहराई माप सके और न यह पता कर सके कि इसमें सुनामी के समय लहरें उठने का क्या कारण था अलबत्ता उन्हें इसकी गहराई में कुछ विचित्र और लुप्त प्राय जलीय जीव-जंतु देखने को जरूर मिले थे।

अब लगता है संस्कृत विद्यालय
कभी पांडवों के प्राकृतिक आश्रय स्थल रहे इस महाभारत कालीन भीमकुंड में अब एक संस्कृत विद्यालय संचालित होता है। इसके अलावा यहां मंदिर भी हैं और हर वर्ष मकर संक्रांति पर मेला लगता है जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।

ये भी पढ़ें

image