20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भाजपा के मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने रहते कमाई अकूत दौलत, अब लोकायुक्त करेगा कार्यवाई

भाजपा के मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने रहते कमाई अकूत दौलत, अब लोकायुक्त करेगा कार्यवाई  

2 min read
Google source verification
gauri-shankar-bisen.jpg

BJP minister Gaurishankar Bisen

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष व भाजपा विधायक गौरीशंकर बिसेन के खिलाफ दायर आय से अधिक संपत्ति के मामले की याचिका में लोकायुक्त को विधि सम्मत जांच करके कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ व न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने इस आदेश के साथ याचिका निराकृत कर दी।

आय से अधिक संपत्ति के मामले में हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण किया
ओबीसी आयोग के अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन के खिलाफ लोकायुक्त विधि अनुसार कार्रवाई करे

जनहित याचिका बालाघाट लांजी से समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक किशोर समरीते ने 2012 में दायर की थी। जिसमें आरोप लगाए थे कि तत्कालीन कैबिनेट मंत्री गौरीशंकर बिसेन के पास वर्ष 1984 में कोई खास संपत्ति नहीं थी। विधायक व मंत्री रहते हुए उनकी संपत्तियों में लगातार असामान्य बढ़ोत्तरी हुई है। कई बेशकीमती संपत्तियां उनके व उनके परिवार के सदस्यों और अन्य रिश्तेदारों के नाम से खरीदी गयी हैं। बिसेन द्वारा 2003 से 2011 के बीच चुनाव आयोग को दी गई संपत्तियों की जानकारियां भी याचिका के साथ प्रस्तुत की गयी थी।

शिकायतें देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं
याचिका में कहा गया संबंधित अधिकारियों को शिकायतें देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका में आरोप लगाया गया कि बिसेन ने अपनी पुत्री मौसम के नाम पर पुणे में 50 लाख रुपये का फ्लैट खरीदा। बालाघाट कलेक्टर के निवास के सामने ढाई करोड़ रुपए की जमीन खरीदी। बालाघाट के पटेरिया कैम्पस में पत्नी रेखा बिसेन के नाम पर 91 लाख रुपयों की जमीन खरीदी।सेनेटरी पाइप बनाने वाली एक फैक्ट्री उन्होंने 90 लाख रुपयों में खरीदी। कोठारी दाल मिल गर्रा के पास 7 करोड़ रुपयों की कृषि भूमि और वारासिवनी में मदरसा के पास पांच एकड़ जमीन खरीदी। बालाघाट में करोड़ों रुपये में 11 एकड़ जमीन बेनामी संपत्ति के रूप में खरीदी है। इस मामले में गौरीशंकर बिसेन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रवीश अग्रवाल व स्वप्निल गांगुली ने कहा कि इस मामले में दो बार जांच हो चुकी है। उस जांच में आरोप साबित नहीं हुए।