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250 रहता था बीपी, लापरवाही करी तो खराब हो गई किडनी, पत्नी ने बचाई जान

अगर आप भी ब्लड प्रेश की बीमारी से पीडि़त हैं, तो चिकित्सक द्वारा बताई गई गोली दवाई समय पर लें, समय-समय पर बीपी की जांच कराएं, अगर शरीर में कुछ अलग महसूस हो रहा है, तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं, ताकि बीपी के चलते आपको किसी प्रकार की बड़ी बीमारी का सामना नहीं करना पड़े।

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250 रहता था बीपी, लापरवाही करी तो खराब हो गई किडनी, पत्नी ने बचाई जान

250 रहता था बीपी, लापरवाही करी तो खराब हो गई किडनी, पत्नी ने बचाई जान

जबलपुर. मध्यप्रदेश में ब्लड प्रेशर के मरीज द्वारा लापरवाही करने के कारण किडऩी खराब होने का मामला सामने आया है, एक व्यक्ति की ब्लड प्रेशर अक्सर 200-250 रहता था, इसके बावजूद भी समय पर उपचार और दवाईयां नहीं ली, ऐसे में जब ज्यादा तबियत खराब हुई तो जांच करने पर किडनी भी खराब निकली, यह तो अच्छा हुआ कि पत्नी ने ऐन वक्त पर किडनी देकर पति की जान बचा ली, इसलिए अगर आप भी ब्लड प्रेश की बीमारी से पीडि़त हैं, तो चिकित्सक द्वारा बताई गई गोली दवाई समय पर लें, समय-समय पर बीपी की जांच कराएं, अगर शरीर में कुछ अलग महसूस हो रहा है, तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं, ताकि बीपी के चलते आपको किसी प्रकार की बड़ी बीमारी का सामना नहीं करना पड़े।

मेडिकल में 41 वर्षीय व्यक्ति का एक साल से डायलिसिस चल रहा था। पति को नई जिंदगी देने के लिए उसकी 35 वर्षीय पत्नी ने अपनी एक किडनी देने का निर्णय लिया। 13 मार्च को किडनी प्रत्यारोहण किया गया।

बीपी 250 तक रहता था, अनदेखी की और किडनी हो गई खराब

41 वर्षीय व्यक्ति को पिछले कुछ वर्षों से ब्लड प्रेशर की समस्या थी। बीपी बढऩे पर शुरुआत में कुछ शारीरिक समस्या महसूस हुई तो अनदेखा कर दिया। धीरे-धीरे बीपी 200 और 250 तक पहुंच गया। इसके बावजूद समय पर दवाइयां लेने में लापरवाही की । किडनी की जांच भी नहीं कराई। कुछ समय बाद सेहत ज्यादा बिगडऩे पर अस्पताल में भर्ती हुआ तो जांच में किडनी खराब मिली। तुरंत दवा और फिर डायलिसिस से बीपी को नियंत्रित करने की कोशिश की गई। अच्छी बात यह है कि किडनी ट्रांसप्लांट के बाद अब मरीज का बीपी नियंत्रण में है।

नि:शुल्क सर्जरी और उपचार

सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में मरीज का किडनी ट्रांसप्लांट आयुष्मान योजना के तहत नि:शुल्क हुआ। ऑपरेशन के लिए यूरो सर्जरी विभाग की दोनों ओटी को ऑर्गन रिट्रीवल एवं ट्रांसप्लांट के लिए तैयार किया गया। नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी एवं एनस्थीसिया विशेषज्ञों की टीम ने पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। निजी अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट पर लगभग 5-10 लाख रुपए खर्च होते हैं।

छह महीने में दूसरा प्रत्यारोपण

सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल को किडनी ट्रांसप्लांट का लाइसेंस मिलने के बाद यहां छह महीने में दूसरे मरीज का सफल किडनी प्रत्यारोपण हुआ है। पिछले वर्ष सितंबर में कटनी निवासी एक युवक का जटिल किडनी प्रत्यारोपण किया गया था। उसे पिता ने किडनी दी थी। पिता-पुत्र दोनों स्वस्थ हैं।

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युवा डॉक्टरों का कमाल

सफल किडनी प्रत्यारोपण के पीछे भी युवा उत्साही डॉक्टरों की टीम रही। यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. फणींद्र सोलंकी और नेफ्रोलॉजी के डॉ. नीरज जैन के साथ मिलकर विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने मिलकर किडनी प्रत्यारोपण की सुविधाएं जुटाई। डॉ. सोलंकी ने दूसरे शहर जाकर सर्जरी का अनुभव प्राप्त किया। इसके बाद सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में छह माह में दो सफल किडनी प्रत्यारोपण किया। इस टीम में डॉ. तुषार, डॉ. प्रशांत पटेल, डॉ. अविनाश ठाकुर, डॉ. अनुराग दुबे, डॉ. अर्पणा, डॉ. मीना, डॉ. विश्वनाथ, डॉ. कमल, डॉ. अनिवेश और ऋतिका भी शामिल थे।

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