सोसायटी फार लीगल एड एंड ज्यूडिशियल रिफार्म ने की सहायता जबलपुरसम्पत्ति के विवाद में सगे भाई ने ही अपने बुजुर्ग भाई और उनकी पत्नी पर तीन मुकदमे दर्ज करा दिए। इससे परेशान बुजुर्ग दम्पती के दर्द को हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति डीके पालीवाल की एकलपीठ ने समझा और दस्तावेज देखने के बाद प्रकरण खारिज कर बड़ी राहत दी।
इस मामले में सोसायटी फार लीगल एड एंड ज्यूडिशियल रिफार्म के प्रमुख अधिवक्ता रविंद्र गुप्ता का सराहनीय योगदान रहा। दरअसल, बुरहानपुर निवासी वयोवृद्ध जम्बू पाटिल व सिम्मी पाटिल पिछले कई दिनों ने हाई कोर्ट के चक्कर काट रहे थे। दोनों बेहद परेशान थे। कोई उनकी व्यथा को नहीं समझ रहा था। इसी बीच अधिवक्ता गुप्ता ने उनकी समस्या को गंभीरता से सुनकर याचिका तैयार कर दी। जिसे दायर करने के बाद वृद्ध दंपति हाई कोर्ट में अपना पक्ष रखने स्वयं खड़े हुए।
कांपते स्वर में बयां किया दर्द
हाई कोर्ट के समक्ष बुजुर्ग दम्पती ने जो कहानी सुनाई, उससे कोर्ट सन्न रह गई। उन्होंने बताया कि वे बुरहानपुर के एक रईस खानदान से ताल्लुक रखते हैं। पिता सूती कपड़ों के बड़े व्यापारी थे। जब तक वे जीवित रहे संपत्ति में बराबर हक बना रहा। किंतु उनके निधन के साथ ही बड़े भाई ने समूची संपत्ति पर एकाधिकार कर घर से निकाल दिया। हक मांगने पर अभद्रता और मारपीट की। यहां तक कि तीन झूठे मुकदमे दर्ज करा दिए। यह सब पुलिस की मिलीभगत से कराया गया।
जारी हुआ था वारंट
एक मामले में अदालत में पेशी की पूर्व निर्धारित तिथि बदलवाकर गैर हाजिरी की सूरत में गिरफ्तारी वारंट जारी करा दिया गया। एलएलबी डिग्रीधारी जम्बू पाटिल ने बताया कि जब गिरफ्तारी का खतरा मंडराने लगा तो हम हाई कोर्ट चले आए। यहां सोसायटी फार लीगल एड एंड ज्यूडिशियल रिफार्म के प्रमुख अधिवक्ता रविंद्र ने रैन बसेरा और फिर वृद्धाश्रम में रहने का इंतजाम कराया।