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इस जंगल में हैं 25 हजार साल पुरानी ‘रॉक पेटिंग्स’, जमीन के नीचे दबा है बेशकीमती हीरा

इस जंगल में हैं 25 हजार साल पुरानी ‘रॉक पेटिंग्स’, जमीन के नीचे दबा है बेशकीमती हीरा  

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Sundarbans mangrove forest in danger:  कोलकाता का सुरक्षा कवच सुन्दरवन मैंग्रोव जंगल पर खतरा

Sundarbans mangrove forest in danger: कोलकाता का सुरक्षा कवच सुन्दरवन मैंग्रोव जंगल पर खतरा,Sundarbans mangrove forest in danger: कोलकाता का सुरक्षा कवच सुन्दरवन मैंग्रोव जंगल पर खतरा,Sundarbans mangrove forest in danger: कोलकाता का सुरक्षा कवच सुन्दरवन मैंग्रोव जंगल पर खतरा

जबलपुर। मप्र के समृद्ध जंगलों में शामिल बक्सवाहा का जंगल प्राकृतिक दृष्टि अतिमहत्वपूर्ण है। इसमें जहां सदियों पुरानी मानव सभ्यता के प्रमाण आज भी मौजूद हैं, वहीं वन्य जीवन भी खूब फलता फूलता है। जबकि जमीन के नीचे बेशकीमती हीरों की खदानें भी है। एएसआई इस जंगल को पुरातत्व महत्व का बताकर नोटिफाइड कर चुकी है। ऐसे में एक बार फिर से बक्सवाहा का जंगल प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।

आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने पेश किया जवाब
बक्सवाहा को पुरातात्विक सम्पदा घोषित करने पर तेजी से चल रहा विचार

दरअसल, हाईकोर्ट के पूर्व निर्देश के पालन में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से पेश जवाब में कहा गया कि राज्य सरकार उन्हीं पुरातात्विक सम्पदाओं का संरक्षण करती है, जिन्हें नोटिफाइड किया गया है।
बक्सवाहा में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने वर्ष 1958 के कानून के तहत सर्वे किया है और पुरातात्विक सम्पदा पाई। अब इसे नोटिफाइड करने के लिए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया तेजी से विचार कर रही है।

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे ने जनहित याचिका दायर की। इसमें कहा गया कि आर्कियोलॉजिकल सर्वे में बक्सवाहा जंगल में 25 हजार वर्ष पूर्व की रॉक पेटिंग्स मिली हैं। चंदेल व कल्चुरी युग के अवशेष मिले हैं। ऐसे में डायमंड माइनिंग से यह पुरातात्विक सम्पदा नष्ट हो सकती है। हाईकोर्ट ने 26 अक्टूबर, 2021 को बक्स्वाहा के जंगलों में किसी भी खनन गतिविधि पर रोक लगा दी थी। साथ ही पुरातत्व विभाग, वन विभाग व एस्सेल माइनिंग कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया था। इसी परिप्रेक्ष्य में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से जवाब प्रस्तुत किया गया। याचिकाकर्ता का पक्ष अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने रखा।