जबलपुर

केवल हवा और दूध पीकर जिंदा हैं ये मौनी बाबा, वीडियो में बताए अजब राज

पहले थे बड़े नेता, अचानक कुर्ता-पायजामा उतारकर रख लिया ये वेश

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पहले थे बड़े नेता, अचानक कुर्ता-पायजामा उतारकर रख लिया ये वेश

जबलपुर। किसी को एक दिन खाना नहीं मिले तो शरीर जवाब देने लगता है, लेकिन एक सख्श ऐसे भी हैं, जिन्होंने पिछले तीन साल से अन्न का एक दाना भी नहीं खाया। वे महज एक गिलास दूध पीकर जिंदा हैं। बात हो रही है, पाटन से करीब 6 किलोमीटर दूर ग्राम सिमरिया (बढ़ैयाखेड़ा) के हनुमान मंदिर में रह रहे परमानंद त्यागी महाराज की। वे दूध पीते हैं और भजन में मस्त रहते हैं। एक सवाल पर त्यागीजी ने कहा कि भजन में ऐसा जादू है कि उसी में आत्मा तृप्त रहती है। ग्रामीणों के अनुसार त्यागीजी पहले पाटन जनपद के सदस्य थे। पुष्पेंद्र दुबे के नाम से उनकी हर तरफ ख्याति थी, एक दिन अचानक उन्होंने कुर्ता-पायजामा त्याग दिया और अवधूत जैसा वेश धारण कर लिया। उनके हृदय परिवर्तन की दासतान भी बड़ी रोचक है।

छोड़ा जनपद का पद
सिमरिया निवासी आरएस ठाकुर व बहादुर सिंह ने बताया कि सन् 2008 के चुनाव के बाद पुष्पेन्द्र दुबे पाटन क्षेत्र से जनपद सदस्य चुने गए थे। उस समय उनकी उम्र करीब 35 साल रही होगी। जनपद सदस्य रहते हुए उन्होंने क्षेत्र में कई विकास कार्य कराए। उनकी काफी लोकप्रियता थी। लोग उन्हें सिमरिया वाले पुष्पेन्द्र महाराज के नाम से जानते थे। सन् 2012-13 में उन्होंने अचानक नेता गिरी वाले वस्त्र त्याग दिए और अनाज रखने वाला बोरा (बारदाना) पहनकर भजन करने लगे। गर्मी हो या सर्दी अब वे मात्र कच्छी और लंगोटी ही धारण करते हैं। उनका नाम अब परमानंद त्यागी महाराज और मौनी महाराज हो गया है।

वह सब माया है
सिमरिया से बढ़ैयाखेड़ा गांव को जोडऩे वाले पुल के किनारे बने प्राचीन सिद्ध हनुमान मंदिर में त्यागी जी मानस के सुंदर कांड के श्रवण में मगन थे। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि दुनिया का ये जो आवरण दिख रहा है, यह सब प्रभु की माया है। जीवन का आनंद और उसकी सार्थकता प्रभु के भजन में ही है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति का जन्म होता है तो वह वादा करके आता है कि भू-लोक में जाकर भजन और धर्म-कर्म करेगा, लेकिन जन्म लेने के बाद वह माया के मोह जाल में फंस जाता है। यह मोह-माया उसकी मुक्ति की राह में सबसे बड़ी बाधा है। परमात्मा के चरणों में अनुराग और मुक्ति ही आत्मा की यात्रा का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए।

ऐसे बने अवधूत
एक सवाल पर त्यागीजी ने कहा कि जनपद सदस्य रहने के दौरान उनकी मुलाकात परम साधक, त्यागी नेपाली बाबा से हुई। उन्होंने प्रभु के भजन को ही सर्वोपरि बताया। उनकी बात इनकी प्रेरणास्पद रही कि मन में विरक्ति का भाव जाग्रत हो गया और मैंने उनकी दीक्षा लेकर यह वेश धारण कर लिया। यही सच है क्योंकि आदमी ऐसे ही धरती पर आता है और उसे ऐसे ही जाना पड़ेगा।

सुंदरकांड के अखंड स्वर
सिमरिया और बढ़ैयाखेड़ा के बीच बने प्राचीन व सिद्ध हनुमान मंदिर में त्यागीजी का डेरा है। बढ़ैयाखेड़ा निवासी रिकूं तिवारी, राजेन्द्र तिवारी ने बताया कि त्यागीजी सिमरिया गांव के ही रहने वाले हैं, लेकिन कभी घर नहीं जाते। वे मोबाइल व कोई भी आधुनिक साधन का इस्तेमाल नहीं करते। व्रत के अनुसार वे मात्र गाय का दूध गृहण करते हैं। त्यागीजी की पहल पर यहां हनुमान मंदिर में पिछले करीब तीन साल से अखंड सुंदरकाड चल रहा है। ग्रामीणों की टोली इसमें सहयोग करती है। बढ़ैयाखेड़ा निवासी किशोरीलाल अवस्थी, मोहित पांडेय, ने बताया कि त्यागीजी के सभी भाई अच्छे पदों पर हैं। उनके पिता दलपत प्रसाद दुबे और मां आशारानी दुबे पुत्र के इस कृतित्व से बेहद खुश हैं।

धारण कर लिया मौन
बढैय़ाखेड़ा निवासी गुड्डू तिवारी, उमेश तिवारी व नीरज तिवारी ने बताया कि त्यागीजी महाराज मौन रहते हैं। वे केवल सिमरिया गांव की सीमा में आने के बाद ही बात करते हैं। रामकृष्ण तिवारी व विनोद दुबे के अनुसार त्यागी महाराज ने कटंगी स्थित शिला माई मंदिर में भी अखंड संकीर्तन प्रारंभ कराया है। उन्होंने आसपास के गांवों में भजन मंडलियों का भी गठन किया है, जो अपनी अपनी बारी के अनुसार राम नाम का अखंड संकीर्तन करती रहती हैं। सिमरिया निवासी राम कुमार सिंह, मोहन सिंह ने बताया कि अखंड सुंदरकांड व संकीर्तन की वजह से क्षेत्र का माहौल धर्ममय है। लोग मंदिर में यथा संभव सहयोग भी कर रहे हैं।

Published on:
07 Jan 2019 05:54 pm
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