
Charted accountant couple put camp in Jabalpur
जबलपुर । यूके के लंदन सिटी से एनआरआई चार्टड एकाउंटेंट दम्पति अपनी साढ़े पांच साल की बेटी को नई जिंदगी देने के लिए जबलपुर आए हैं। ग्लोबल डेवलपमेंट डिले की वजह से वह बोलने-सुनने और समझने में अक्षम है। मेडिकल कॉलेज कॉलेज के ईएनटी विभाग में उसे स्पीच एंड लैंग्वेल थैरेपी कराई जा रही है। एक्सपट्र्स को भरोसा है कि वह सामान्य बच्चों की तरह एक्टिव हो जाएगी।
लंदन में चल रहा इलाज
यूपी के लखनऊ के मूल निवासी अजय अग्रवाल 15 वर्षों से लंदन में चार्टड एकाउंटेंट हैं। पत्रिका से बातचीत में उन्होंने बताया, लंदन में उनकी बेटी अनुष्का का ट्रीटमेंट चल रहा है। वहां प्राफेशनल एक्सपर्ट कम मिलते हैं। बोलने की प्रैक्टिस के लिए टीचर और पैंरेंट्स को एजुकेट करते हैं। जबलपुर की चार्टड एकाउंटेंट दोस्त के बच्चे को ऐसी प्राबलम के बाद मेडिकल कॉलेज में रिस्पांस मिला था। उन्होंने स्टूडेंट हिमानी बंसल का कांटेंट नम्बर दिया। सोशल मीडिया पर चार माह बातचीत के बाद एक अगस्त को वे जबलपुर आ गए। बैचलर ऑफ ऑडियोलॉजी एंड स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजी की कोआर्डीनेंटर डॉ. कविता सचदेवा एवं असिस्टेंट कोआर्डीनेटर इरफाना की देख-रेख में थैरेपी की जा रही है। ऑल इंडिया स्पीच इंस्टीट्यूट ऑफ स्पीच एंड हियरिंग से संबद्ध कोर्स मप्र में इकलौते मेडिकल कॉलेज में संचालित है।
थैरेपी से हो रहा इम्प्रूवमेंट
अनुष्का की मां कल्पना अग्रवाल ने बताया, जबलपुर में पैक्टिस से इम्प्रूवमेंट है। अनुष्का का आई कांटेंट बेटर हुआ है। पहले आंख में आंख मिलाकर नहीं देखती थी तो उसे इशारे समझने में दिक्कत आ रही थी। एक गेस्ट हाउस में वे एक अगस्त से रह रहे हैं। सात साल के बेटे अर्जुन को वो लंदन में छोड़कर आई हंै। लेकिन, बेटी को नई जिंदगी देने के लिए छह माह से अधिक समय जबलपुर में बीताने को तैयार हैं। जबलपुर में एक्सपर्ट आसानी से मिल रहे हैं। लंदन में साल में 10-12 बार ही कंसल्टेंट मिलते हैं।
इनका कहना है
मेडिकल कॉलेज में एनआरआई के बच्चे की थैरेपी होना अच्छी बात है। यह केस मेरी नॉलेज में है। अनुष्का को थैरेपी दी जा रही है। ट्रीटमेंट के लवेल पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
डॉ. नवनीत सक्सेना, डीन, मेडिकल कॉलेज
Published on:
10 Aug 2018 08:36 pm
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