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जबलपुर। इमरान हाशमी की फिल्म चीट इंडिया बहुत जल्द रिलीज होने वाली है। इस फिल्म में होनहार छात्रों को पैसा देकर कमजोर छात्रों को बड़ी कॉम्पटेटिव परीक्षाओं में पास कराने का रैकेट चलाने का तरीका दिखाया गया है। लेकिन ये बहुत कम लोग जानते हैं कि इसकी असली पटकथा मप्र में दस साल पहले ही लिख दी गई थी। यहां हुए व्यापमं घोटाला इसका असली सूत्रधार लगता है। जहां फिल्म में दिखाए जाने वाले चित्रण को असल जिंदगी में फिल्माया गया है। हालांकि कहानी काल्पनिक है, लेकिन व्यापमं घोटाला असल है।
न्यूज फैक्ट-
सीबीआई ने चार्जशीट में बताया
फर्जीवाड़े से 15 ने लिया था एमबीबीएस में प्रवेश
एक छात्र को पीएमटी पास कराने के लिए 7-7 सॉल्वर व मध्यस्थ करते थे फर्जीवाड़ा
सीबीआइ की ओर से व्यापमं घोटाले के लिए गठित विशेष कोर्ट के समक्ष गुरुवार को पीएमटी 2008,09,10 में फर्जीवाड़े के 35 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश कर दी गई। इनमें 15 मेडिकल छात्र, 9 रैकेटियर व 11 सॉल्वर शामिल हैं। इन 11 में से 9 सॉल्वर यूपी से हैं, जो प्रवेश लेने वाले छात्र की जगह परीक्षा देते थे। सीबीआई की चार्जशीट से खुलासा हुआ कि घोटाले के आरोपितों का काम करने का तरीका बहुत ही संगठित था। एक छात्र को फर्जी तरीके से एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने के लिए सात-सात रैकेटियर, मिडिलमैन व सॉल्वर जुटते थे। हर हाल में सबंधित छात्र को परीक्षा में सफल कराने के लिए ये सभी परीक्षा कक्ष से व्यापमं के कार्यालय तक सक्रिय हो जाते थे।
व्यापमं के विशेष लोक अभियोजक मुकेश मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2008, 2009 और 2010 में व्यवसायिक परीक्षा मंडल द्वारा आयोजित पीएमटी की परीक्षा में आरोपी छात्र सम्मिलित हुए थे। पीएमटी परीक्षा में उत्तीर्ण होने के आधार पर आरोपियों ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में प्रवेश लिया था। वर्ष 2011 में कॉलेज प्रबंधन की जांच में पाया गया कि परीक्षा फार्म में चस्पा फोटो से छात्रों का चेहरा नहीं मिल रहा है। परीक्षा के दौरान लिए गए फिंगर प्रिंट का भी छात्रों से फिंगर प्रिंट से मिलान नहीं हो रहा है। कॉलेज प्रबंधन की शिकायत पर गढ़ा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 419, 420, 467, 468, 471 व मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया था। एसआईटी के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामले को सीबीआई के सुपुर्द कर दिया गया था।
ये हैं मिडिलमेन व रैकेटियर- हरे सिंह धार, राहुल निरंजन छतरपुर, अभिषेक सचान कानपुर, डॉ. सत्येन्द्र परस्ते अनूपपुर, डॉ. मनीष जोंजारे भोपाल, अमर सिंह गौड़ कानपुर, डॉ. आलोक गंगवार फर्रूखाबाद, सौरभ सैयाम अनूपपुर, नंदलाल यादव आजमगढ़, अजीत सिंह कुशवाहा फतेहपुर उत्तरप्रदेश।
ये थे सॉल्वर- आशीष उत्तम कानपुर, रमेश पाल हरदोई, प्रवीण चंदेल छतरपुर, नरेन्दर राजोरिया भिंड, शिखा राजपूत कानपुर, नवीन गुप्ता हरदोई यूपी, विवेक केशरवानी चित्रकूट यूपी, रामधारी यादव आजमगढ़ यूपी, डॉ. अमित दुबे गोरखपुर, सुजीत यादव प्रतापगढ़ और शेख फखरे आलम गोंडा यूपी, डॉ विकास पाल जौनपुर शामिल हैं।
ऐसे आया सच सामने
सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ कि केंद्रीय विद्यालय लखनऊ पीएमटी 2009 की परीक्षा में आशीष चौहान की जगह फतेहपुर के अजीत सिंह कुशवाहा ने परीक्षा दी थी। परीक्षा के बाद आशीष की ओएमआर शीट में गड़बड़ी व उसे सफल घोषित कराने के लिए हरे सिंह वस्केल, राहुल निरंजन, अभिषेक सचान, आलोक गंगवार, आशीष उत्तम ने कई स्तर पर फर्जीवाड़ा किया। यहां तक कि प्रवेश के समय भी पहले अजीत सिंह ही समिति के समक्ष पहुंचा था।
इन छात्रों के खिलाफ दर्ज था प्रकरण
संजय यादव मुरैना, प्रवीण यादव, रवि प्रताप सिंह भिंड, विजेंदर सिंह राजपूत रायसेन, आशीष चौहान राजगढ़, मनमोहन सिंह झाबुआ, गोविंद अहिरवार छतरपुर, जगदीश टैगोर मुरैना, मेघराज खातरकर भोपाल, अजय मंडलोई खरगौन, मधुसूदन बामनिया, पवन देव मोंगिया शहडोल, धीरेन्द्र सिंह मुवेल धार, यशवंत सिंह अनूपपुर, स्वाती सोनवानी शहडोल। प्रवीण यादव की विवेचना के दौरान मृत्यु हो गई। मधुसूदन बामनिया को सीबीआई ने निर्दोष पाकर छोड़ दिया।
Published on:
21 Dec 2018 12:08 pm
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