लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर गीत गूंज रहे हैं। केलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेडराय, आदित लिहो मोर अरगिया, दरस देखाव ए दीनानाथ, उगी है सुरुजदेव, हे छठी मइया तोहर महिमा अपार, कांच ही बास के बहंगिया बहंगी लचकत जाय, छठ पर्व के सबसे प्रसिद्ध गीतों में से एक है। जल्दी-जल्दी ऊग हे सूरुज देर्व, कइलीं बरतिया तोहार हे छठ मईया, कवने दिन उगी छई हे दीनानाथ जैसे पारंपरिक गीत घरों और बाजारों में बजते ही छठ पूजा का माहौल है। इन गीतों में आराध्य देव सूर्य की महिमा का गुणगान है।