30 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

स्मार्ट सिटी जबलपुर में बीच शहर चल रही डेयरियां, सरकार की मौन स्वीकृति

स्मार्ट सिटी जबलपुर में बीच शहर चल रही डेयरियां, सरकार की मौन स्वीकृति

2 min read
Google source verification
dairy farming

dairy farming

जबलपुर। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राज्य सरकार से पूछा कि जबलपुर शहर से डेयरियों को हटाने के मामले में राज्य सरकार मौन क्यों है? एनजीटी के न्यायिक सदस्य शिव कुमार सिंह व एक्सपर्ट मेंबर डॉ अरुण कुमार वर्मा की कोर्ट ने पूछा कि इस मामले पर जवाब क्यों नहीं प्रस्तुत किया जा रहा है? कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि हर हाल में 4 सप्ताह में जवाब पेश किया जाए। अगली सुनवाई 19 जनवरी 2022 को तय की गई।

एनजीटी ने राज्य सरकार से पूछा
शहर से डेयरियां हटाने पर मौन क्यों है सरकार?

जबलपुर निवासी नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ पीजी नाजपांडे व रजत भार्गव ने एनजीटी में एक अर्जी पेश कर कहा कि जबलपुर नगर निगम क्षेत्र में स्थित डेयरियों को बाहर शिफ्ट किया जाए। डेयरियों से निकलने वाले प्रदूषण से डेंगू और मलेरिया फैल रहा है। इसके पहले एक अक्टूबर को एनजीटी ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने को कहा था। इसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से कई बार प्रयास किए गए ताकि शासन जवाब पेश करे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

450 डेयरियों से हो रहा प्रदूषण: अधिवक्ता प्रभात यादव ने कोर्ट को बताया कि जबलपुर नगर निगम क्षेत्र में छोटी-बड़ी करीब 450 डेयरियां संचालित हैं। यहां तक कि पचपेढ़ी जैसे पॉश इलाके में भी डेयरियां चल रही हैं। इनसे निकलने वाला गंदा पानी, गोबर और अन्य अपशिष्ट यहां-वहां फेंकने से बीमारियां होती हैं।

इधर, पूर्व आदेश के बावजूद क्यों नहीं हटाए अतिक्रमण
हाईकोर्ट ने नगर निगम जबलपुर व बरेला नगर परिषद से पूछा कि पूर्व आदेश के बावजूद जबलपुर पेंटीनाका-बरेला रोड के अतिक्रमण क्यों नहीं हटाए गए? प्रशासनिक न्यायाधीश शील नागू व जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की डिवीजन बेंच ने नगर निगम जबलपुर के आयुक्तव नगर परिषद बरेला के सीइओ को अवमानना नोटिस जारी किए। दो सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगा गया।

एमपी स्टेट बार काउंसिल के उपाध्यक्ष व जिला बार एसोसिएशन, जबलपुर के अध्यक्ष आरके सिंह सैनी की ओर से अधिवक्ता राधेलाल गुप्ता व रमाकांत अवस्थी ने कोर्ट को बताया कि 2006 में इस मसले पर जनहित याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान समय-समय पर आदेश-निर्देश जारी किए गए। इनके परिपालन में 80 फुट चौड़ी पेंटीनाका-बरेला रोड को संकरा करने वाले अतिक्रमण हटाए गए। लेकिन, फॉलोअप के अभाव में वे नए सिरे से काबिज हो गए। इससे सडक़ संकरी हो गई है। सडक़ पर कचरा फेंका जाता है। जाम व दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। सडक़ को फोर लेन करने के लिए 70 करोड़ का ठेका जारी हो चुका है। इसके बावजूद सडक़ पर अतिक्रमण का जाल फैला है।

Story Loader