जबलपुर

रक्षा कंपनियों की हुई 11 हजार एकड़ बेशकीमती भूमि

एमएलआर से हटाया रिकॉर्ड, अब रक्षा संपदा कार्यालय नहीं करेगा देखरेख

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Dec 25, 2022
जबलपुर. शहर की चारों आयुध निर्माणियों की 11 हजार एकड़ से अधिक बेशकीमती जमीन का स्वामित्व अब कंपनियों के पास आ गया है।

जबलपुर. शहर की चारों आयुध निर्माणियों की 11 हजार एकड़ से अधिक बेशकीमती जमीन का स्वामित्व अब कंपनियों के पास आ गया है। रक्षा सम्पदा विभाग ने मिलिट्री लैंड रजिस्टर (एमएलआर) से इन जमीन का रिकॉर्ड विलोपित कर दिया है। ऐसे में इनकी सुरक्षा और रखरखाव का जिम्मा कंपनियों के पास रहेगा।

रक्षा मंत्रालय के तहत आयुध निर्माणी बोर्ड के एक अक्टूबर 2021 को विघटन के बाद 7 रक्षा कंपनियों का गठन किया गया था। इन कंपनियों के अंतर्गत आयुध निर्माणियां काम कर रही हैं। जबलपुर की चारों आयुध निर्माणियां भी अलग-अलग कंपनियों के अधीन आ गई हैं। इनके पास हजारों एकड़ जमीन है। इनमें निर्माणी के अलावा कर्मचारियों के आवास, अस्पताल, स्कूल और दूसरी अधोसंरचना भी स्थापित है।

राशि का आदान-प्रदान नहीं

इन सभी भूमियों के रिकॉर्ड का संधारण रक्षा सम्पदा कार्यालय में होता है। नियमों के अनुसार जो सैन्य भूमि या रक्षा भूमि छावनी घोषित नहीं है, उनका उन्हें एमएलआर में दर्ज किया जाता है। अब यह भूमि रक्षा कंपनियों के अधीन हो गई हैं। ऐसे में रक्षा सम्पदा कार्यालय ने इन्हें अपने रिकॉर्ड से हटा दिया है। कंपनियां ही इनका रखरखाव करेंगी। हालांकि, रक्षा मंत्रालय के उपक्रम होने के कारण करोड़ों रुपए की भूमि के लिए कोई राशि का आदान-प्रदान नहीं हुआ है।

सिर्फ सरप्लस जमीन का रखरखाव

एक तरह से यह बिना किसी शुल्क के कंपनियों को प्रदान कर दी गई हैं। केंद्र सरकार व रक्षा मंत्रालय भू-स्वामी अभी तक यह भूमि सीधे रूप से रक्षा मंत्रालय के नाम दर्ज थी। अब भूमि स्वामी केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय भी रहेेगी। रक्षा कंपनियां इन्हें अपने तरीके से इस्तेमाल कर सकेंगी। इसकी तैयारियां कंपनियों ने शुरू कर दी है। इसी प्रकार भूमि पर अतिक्रमण होता है तो उन्हें हटवाने की जिम्मेदारी भी इन्हीं कंपनियों की होगी। अभी यह काम छावनी परिषद के माध्यम से होता था। आयुध निर्माणियों की सारी जमीनें एमएलआर से विलोपित कर दी गई हैं सिवाय सरप्लस जमीन के। यह लगभग एक हजार एकड़ है। इसमें स्कूल, अस्पताल आदि का निर्माण है।

चारों निर्माणियों की अलग हैं कंपनियां

जबलपुर में चारों आयुध निर्माणियां अलग-अलग कंपनियों के अधीन काम कर रही हैं। आयुध निर्माणी खमरिया की कंपनी म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड है। ग्रे आयरन फाउंडी यंत्र इंडिया लिमिटेड के तहत काम कर रही है। वीकल फैक्ट्री जबलपुर एडवांस व्हीकल्स निगम लिमिटेड की इकाई बन गई है। गन कैरिज फैक्ट्री एडवांस वेपंस एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड के अंतर्गत आ गई है।

आयुध निर्माणियाें की जमीनों का स्वामित्व अब रक्षा कंपनियों के पास आ चुका है। ऐसे में मिलिट्री लैंड रजिस्ट्रर से रिकॉर्ड को विलोपित कर दिया गया है। इनका रखरखाव यही कंपनियां करेंगी। जो अतिरिक्त भूमि है, उसका रिकॉर्ड ही कार्यालय रखेगा।

राजीव कुमार, रक्षा सम्पदा अधिकारी जबलपुर

Published on:
25 Dec 2022 02:50 pm
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