
DJ sound
DJ sound : आधुनिकता और जश्न के नाम पर शहर की शांति अब शोर में दबती जा रही है। शादी-बारात का सीजन हो या धार्मिक आयोजन, ‘डीजे वाले बाबू’ की धमक अब आमजन के लिए जानलेवा साबित हो रही है। ता’जुब की बात यह है कि प्रशासन की तमाम बंदिशों और अदालती गाइडलाइंस के बावजूद, सडक़ों पर कान फोड़ू संगीत का तांडव जारी है। रोक और कार्रवाई के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है। इन दिनों चल रहे वैवाहिक सीजन में हर बारात में डीजे का शोर हो रहा है। जो ध्वनि प्रदूषण को चरम पर ले जा रहा है।
शहर के रिहायशी इलाकों से निकलने वाली बारातों में डीजे की आवाज तय डेसीबल की सीमा को कई गुना पार कर चुकी है। आलम यह है कि जब डीजे का काफिला गुजरता है, तो घरों की खिड़कियां और दरवाजे तक थरथराने लगते हैं। लोगों का कहना है कि आवाज इतनी तेज होती है कि केवल कानों में दर्द ही नहीं होता, बल्कि हृदय में तेज धमक महसूस होती है। बुजुर्गों और हृदय रोगियों के लिए यह शोर किसी हमले से कम नहीं है।
नियमों के मुताबिक, किसी भी सार्वजनिक आयोजन में लाउडस्पीकर या डीजे बजाने के लिए स्थानीय प्रशासन से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। लेकिन शहर में स्थिति इसके विपरीत है। गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य मार्गों तक, बिना किसी वैध अनुमति के धड़ल्ले से डीजे बज रहे हैं। पुलिस और नगर निगम की टीमें केवल उन्हीं मामलों में सक्रिय दिखती हैं जहां शिकायतें सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती हैं, अन्यथा धरातल पर सब कुछ ठीक है का खेल चल रहा है।
चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस बढ़ते शोर पर गंभीर चिंता जताई है। जिला अस्पताल के डॉ. पंकज ग्रोवर के अनुसार लगातार तेज शोर के संपर्क में रहने से न केवल सुनने की क्षमता कम होती है, बल्कि यह उ‘च रक्तचाप, अनिद्रा और तनाव का मुख्य कारण बन रहा है। डीजे की लो-फ्रीक्वेंसी वाली धमक सीधे दिल की धडकऩ को प्रभावित कर सकती है, जो कमजोर दिल वालों के लिए घातक है।
खुसुर-फुसुर- &0 डेसीबल
सामान्य बातचीत- 60 डेसीबल
व्यस्त सडक़- 80 डेसीबल
85 डेसीबल से अधिक शोर सुनने की क्षमता कमजोर करता है।
दिन के समय सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक अधिकतम 55 डेसीबल
रात के समय रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक अधिकतम 45 डेसीबल
दिन में 55 डेसीबल- यह सामान्य बातचीत या सामान्य घरेलू कामकाज के शोर के बराबर है।
रात में 45 डेसीबल- यह शांत वातावरण या हल्की फुसफुसाहट जैसा है, जो सोने के लिए उपयुक्त है।
शांत क्षेत्र - स्कूल, अस्पताल और अदालतों के 100 मीटर के दायरे में दिन में 50 डेसीबल और रात में 40 डेसीबल की सीमा होती है।
सुबह 6 से रात 10 बजे तक अधिकतम 65 डेसीबल
रात 10 से सुबह 6 बजे तक अधिकतम 55 डेसीबल
सुरक्षित सीमा- 8 घंटे के कार्यदिवस के लिए 85 डेसीबल को औसत सुरक्षित सीमा माना जाता है। इससे अधिक होने पर सुनने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।
प्रशासनिक अमला बीच-बीच में कुछ डीजे संचालकों पर जुर्माना लगाकर अपनी पीठ थपथपा लेता है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। रात 10 बजे के बाद भी शोर थमने का नाम नहीं लेता। जब तक प्रशासन सख्त जब्ती और लाइसेंस रद्दीकरण जैसी कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक आम जनता की रातों की नींद और दिल की सेहत यूं ही दांव पर लगी रहेगी।
Updated on:
11 Feb 2026 07:26 pm
Published on:
11 Feb 2026 05:16 pm
