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रसीले और मीठे आम की खूब मांग, रोजाना 25 टन की खपत

बादामी की सबसे ज्यादा आवक, दसहरी और हापुस भी बाजार में

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जबलपुर. फलों का राजा आम बाजार में हर तरफ नजर आ रहा है। यह हर किसी को लुभा रहा है। अभी सबसे ज्यादा आवक बादामी आम की हो रही है। इसके दाम कम होने से खरीदी बढऩे लगी है। हालांकि कुछ मात्रा में दसहरी और अन्य किस्मों की भी आवक हो रही है। फल मंडी में आसपास और दूसरे राज्यों से रोजाना 20 से 25 टन आम आ रहा है।

तेलंगाना और बारंगल से बादामी आम की आवक हो रही है। वहां इसकी खूब पैदावार हुई है। इसलिए इसकी कीमत 40-45 रुपए किलो है। नागपुर से भी कुछ मात्रा में इसकी आवकर हो रही है। यहां से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों व आसपास के जिलों में इसकी सप्लाई हो रही है। दसहरी आम आमतौर पर उत्तर प्रदेश से आता है। वहां बारिश के कारण फसल पर असर हुआ है।

महाराष्ट्र में अच्छी पैदावार

कारोबारी दसहरी आम के विकल्प के तौर पर महाराष्ट्र के नागपुर शहर और आसपास के इलाकों के बगीचों से इसे मंगा रहे हैं। यह सबसे मीठे आमों में से एक है। इसलिए इसकी मांग खूब रहती है। हालांकि कमजोर आवक के कारण यह 80-100 रुपए किलो तक बिक रहा है।

ये किस्में भी : हापुस, लंगड़ा, चौसा, सुंदरी, अमराफली, लाल पट्टा, सफेदा, चुसनी, नीलम, फजली।

कीमत अभी है सामान्य

आम के थोक विक्रेता देवांश दीवान ने बताया कि मंडी में प्रतिदिन 20-25 टन बादामी आम की आवक हो रही है। अन्य किस्मों के आम अभी कम आ रहे हैं। कुछ जगहों पर बारिश से फसल थोड़ी देर से आ रही है। फुटकर विक्रेता सोनू ने बताया कि ज्यादातर ग्राहक बादामी आम मांगते हैं। यह रसीला और मिठास से भरा होता है। इसकी कीमत भी आम की अन्य किस्मों से कम होती है।

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