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कमाल के स्कूल ….यहाँ पढ़ाई शुरू करने से पहले लगानी पड़ती है झाड़ू

शिक्षको को निर्देश प्रदान कर दिए हैं

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dirty pic of gorment school

dirty pic of gorment school

गोटेगांव/जबलपुर। स्वच्छता अभियान की कार्यशाला में समस्त सरकारी शालाओं के प्रधान पाठकों को निर्देशित किया गया है कि वह अपनी-अपनी शालाओं को पूरी तरह से साफ-स्वच्छ रखें। सरकारी स्कूलों में मौजूद सुविधाघरों को भी साफ स्वच्छ रखते हुए कार्य दिवस पर उनको खोल कर रखें, ताकि दिल्ली से स्वच्छता का सर्वे करने के लिए आने वाली टीम को किसी प्रकार की गंदगी नजर नहीं आए।


बारी-बारी से करते हैं सफाई
बीइओ केके मेहतो ने उक्त निर्देश शिक्षको को प्रदान कर दिए हैं, लेकिन जब पत्रिका प्रतिनिध ने सरकारी स्कूलों में मौजूदा स्थिति का अवलोकन किया तो गोटेगांव ब्लॉक के किसी भी सरकारी स्कूल में भृत्य का पद स्वीकृत नहीं होने से वहां पर एक भी भृत्य कार्यरत नहीं है फिर इन सरकारी शालाओं में सफाई का कार्य कैसे होता है। पत्रिका प्रतिनिधि ने सरकारी स्कूलों का अवलोकन किया तो देखने को मिला कि सरकारी स्कूल में आने वाले बच्चे पढ़ाई शुरू करने के पहले भवन के की सफाई का कार्य करते हैं। इसके बाद ही वह कमरे के अंदर प्रवेश करते हैं। यह कार्य शाला में पढने वाले बच्चे बारी-बारी से कार्य दिवस पर करते हंै। इसके कारण किसी एक बच्चे पर सफाई करने का भार नहीं पड़ता है।


दो स्कूलों में भृत्य का पद स्वीकृत
सरकारी स्कूल के पाठयक्रम में झाडू लगाने का कोई पाठयक्रम दर्ज नही है फिर भी बच्चों को हर दिन झाडू लगाने का कार्य करना पड़ता है। गोटेगांव ब्लॉक में 252 शासकीय प्राथमिक शालाएं एवं ९८ शासकीय माध्यमिक शालाएं संचालित हैं इनमे सिर्फ श्रीनगर और भैसा माध्यमिक शाला में भृत्य का पद स्वीकृत है शेष शालाओं में भृत्य का पद स्वीकृत ही नहीं है। ऐसे में यहां पर भृत्य रखने का कोई प्रावधान ही नहीं है। जब सरकारी स्कूल भवन के कमरों की साफ सफाई यूं ही हो जाती है तो भृत्य रखने की सरकार को भी जरूरत महसूूस नहीं हो रही है।

अधिकारियों ने दी जानकारी
पत्रिका प्रतिनिधि ने बच्चों के द्वारा साफ-सफाई करने की फोटो खींची जिसपर शिक्षकों का कहना है कि वह क्या कर सकते हैं शाला में बच्चो को पढ़ाने का कार्य करंे या शाला मे झाडू लगाने का कार्य करें। सरकारी स्कूलों में इतना फंड भी नहीं है कि वह अलग से किसी को साफ-सफाई के लिए रख सकें। जिले के अधिकारी साफ-सफाई के क्षेत्र मे जिले को ओडीएफ की तरह प्रमाण पत्र पाने की जुगत में जिलेभर की पंचायतो के साथ सरकारी शालाओ मे स्वच्छता रखने का अभियान चला रही है, लेकिन वह वहां की वस्तुस्थिति से परिचित होकर समुचित व्यवस्था करने मे पीछे हट रही है। यदि सर्वे टीम के सदस्य सरकारी स्कूलों में मौजूद शिक्षक से सवाल करते हैं कि उनके इधर भृत्य नहीं है तो फिर झाडू लगाने का कार्य कौन करता है तो शिक्षक उनको क्या जवाब देगा। इस संबंध में किसी भी अधिकारी ने कार्यशाला में

शिक्षकों को जानकारी नही दी है
ब्लॉक शिक्षा कार्यालय में कार्यरत बीआरसी प्रहलाद दोहैया का कहना है कि सिर्फ दो शालाओं में ही भृत्य का पद स्वीकृत है शेष प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में भृत्य का पद स्वीकृत नहीं होने से वहां पर कोई भी भृत्य कार्यरत नहीं है। स्कूल कक्षों की सफाई कैसे होती है यह उस स्कूल के शिक्षक ही बता सकते हैं।