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जबलपुर

टनल की तरह यहां डेढ़ किमी लंबे नाले में डॉग का हुआ रेस्क्यू

पंद्रह फीट गहरा नाला, अधारताल क्षेत्र में सामने आई घटना, आखिरकार डॉग की बचाई जान

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जबलपुर. उत्तराकाशी में टनल में फंसे श्रमिकों की जान बचाने की तर्ज पर खूनी नाले में फंसे एक डॉग को बचाने जैसा शहर में भी रेस्क्यू ऑपरेशन चला। इस कार्य में एनिमल लवर सामने आए तीन दिनो तक कोशिश चली और आखिरकार डॉग को सकुशल नाले से निकाल लिया गया। यह मामला आधारताल क्षेत्र के खूनी नाले में गिरे एक डॉग का है। दरअसल यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि जिस नाले में डॉग गिर गया था वह करीब 1.5 किलोमीटर तक फैला हुआ है। जो कि पूरी तरह कवर्ड है। कुछ हिस्से में ही जगह छूटी हुई है। नाले के ऊपर मकान और दुकाने बनी हुई है। एक छोटे से हिस्से में ही यह खुला था जिसमें नाले के अंदर से घुसकर डॉग को पकड़ना आसान नहीं थी। दूसरी और नाले में अंधेरे के कारण डॉग भी भयभीत होकर खूंखार हो गया था।
15 फीट गहरा है नाला
आधारताल के धनी की कुटिया के पास िस्थत नाले में जहां डॉग फसा था वह पूरी तरह से कवर्ड है। नाले की गहराई करीब 15 फीट थी जिसमें पानी और मलबा था। अंदर से उक्त नाला किसी सुरंग की तरह था जिसमें अंधेरा होने के साथ ही दलदल भी था तो वहीं जहरीले जीव जंतु का भी डर। इस इस नाले में फंसे डॉग को निकालने के लिए एनिमल लवर वंदना ओझा और उनकी टीम के सिराज हुसैन, नेहा सोनी, कृष्णा द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे थे। जब भी अंदर घुसकर पकड़ने की कोशिश की जाती तो डॉग दौड़कर आगे भाग जाता था। तीन दिनों से चले रेस्क्यू के दौरान सोमवार की शाम को आखिरकार डॉग को पकड़ने में सफलता मिली।
ग्यारस के दिन से नाले में फंसा
एनिमल लवर वंदना ने बताया कि ग्यारस के दिन फटाकों की आवाज के डर से स्ट्रीट डॉग डर के कारण एक छोटे से खुले हिस्से से गहरे नाले में जा गिरा। निकलने के चलते वह नाले के अंदर यहां वहां दौड़ता रहा। जब कुछ लोगों को इसकी आवाज सुनाई दी तो डॉग के होने का पता चला। लेकिन उपर से नाला कवर्ड था वहीं मकन और दुकाने थी। 15 फीट गहरे और 1.5 किलोमीटर लंबे नाले में जाल लेकर घुसकर उनकी टीम लगातार काम कर रही थी। जैसी ही डॉग समाने आए सिराज ने मच्छरदानी के साथ 15 फीट गहरे नाले में छलांग लगाकर डॉग को पकड़ लिया। वंदना और नेहा ने मिलकर उपर खींचकर बाहर निकला। वंदना ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि उनकी मेहनत रंग लाई। तीन दिनों से डॉग भूखा होने के कारण खूंखार भी हो गया था। उसे नहलाकर खाना खिलाया।