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नेत्र रोग, पेचिश और दस्त का शर्तिया इलाज है ये विशेष हल्दी, जानें फायदे

नेत्र रोग, पेचिश और दस्त का शर्तिया इलाज है ये विशेष हल्दी, जानें फायदे  

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turmeric

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जबलपुर. मध्यप्रदेश के पचमढ़ी में प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली दारूहल्दी वनस्पति अब जबलपुर में भी उगाई जा रही है। औषधीय महत्व की यह प्रजाति पचमढ़ी में भी संकटग्रस्त हो चुकी है। राज्य वन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने दारूहल्दी के पौधे तैयार करने की रोपणी तकनीक बनाई है। इसके पौधे भी तैयार किए हैं। इन्हें पंचमढ़ी के साथ ही अमरकंटक और समान जलवायु वाले जंगलों में लगाया जा रहा है। औषीधीय जानकारों के अनुसार दारूहल्दी की जड़, पत्तियां और फल उपयोगी होते हैं। सदाबहार, पर्णपाती झाड़ी तीन से चार मीटर ऊंची होती है। इसका वैज्ञानिक नाम इंडियन बरबेरी है। इसे विभिन्न क्षेत्रों में चित्रा, दारूहल्द, दारूहरिद्र, सुवर्ण वरना और काटा पित्त दारू के नाम से भी जाना जाता है। इसके अंधाधुंध विदोहन और गेहूं की फसल के लिए नुकसानदेय बताए जाने के कारण पचमढ़ी में यह प्रजाति बहुत कम हो गई है।

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राज्य वन अनुसंधान संस्थान ने विकसित की रोपणी तकनीक
जबलपुर में उगाई पचमढ़ी की औषधीय वनस्पति दारूहल्दी

शहडोल भेजे गए पौधे-
राज्य वन अनुसंधान संस्थान की जैव विविधता नर्सरी में वर्ष 2015 में दारूहल्दी उगाने की शुरुआत हुई थी। हाल ही में शहडोल के जंगलों के लिए पौधे भेजे गए हैं।

गेंहू की बीमारी में उजड़ गई वनस्पति-
जानकारों के अनुसार पचमढ़ी की जलवायु में दारूहल्दी जंगलों के साथ ही खेतों में भी बहुतायत से होती थी। वर्षों पहले गेहूं की फसल में पक्सिनिया रोग लगने के कारण इसे उखाड़ दिया गया था। वैज्ञानिकों ने बताया था कि पक्सिनिया का जीवन चक्र गेहंू की फसल और दारूहल्दी पर निर्भर होता है। गेहूं की फसल कटने के बाद पक्सिनिया इसी पौधे पर शिफ्ट हो जाते थे। गेहूं की फसल को सुुरक्षित करने के लिए इसका विदोहन किया गया।

संस्थान की जैव विविधता नर्सरी में दारू हल्दी के पौधे तैयार किए गए हैं। तीन वर्ष में इस औषधीय पौधे की रोपणी तकनीक तैयार की गई है। पचमढ़ी, अमरकंटक सहित अन्य जंगलों में भी इसका रोपण कराया जाएगा।
डॉ. उदय होमकर, सीनियर रिसर्च ऑफिसर

औषधीय उपयोग
दारूहल्दी का उपयोग नेत्र रोग, पेचिश और दस्त के इलाज में होता है। अल्सर और आंतों के संक्रमण के इलाज में भी यह काफी उपयोगी है। इसके तने का काढ़ा हड्डी रोग में काम आता है। इसकी पत्तियां जख्म भरने और चर्म रोग में काफी लाभकारी होती हैं।

संकटग्रस्त प्रजाति को बचाएंगे
दारूहल्दी की जड़, पत्तियां और फल भी उपयोगी होते हैं।