
E-waste
e waste : मोबाइल, टीवी, कप्यूटर, लैपटॉप, एसी, साउंड बॉक्स, फ्रिज, ग्राइंडर मशीन, मेडिकल ई-वेस्ट समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण व वीकल खराब होने पर बड़े पैमाने पर ई-वेस्ट निकल रहा है। घर से लेकर प्रतिष्ठानों, संस्थानों और सर्विस सेंटर से ई-कचरा कबाड़ियों को बेच दिया जाता है। कबाड़ी रीसाइक्लिंग के नाम पर असुरक्षित तरीके से एक-एक पार्ट को अलग करते हैं। शहर में ई-वेस्ट क्लीनिक जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक वाहनों की संया तेजी से बढ़ रही है, उनमें टूट-फूट व खराबी भी आ रही है। ऐसे में आने वाले समय में और बड़ी तादाद में ई-कचरा निकलेगा।
गुरंदी बाजार और रद्दी चौकी के कबाड़ी ई-कचरा खरीदने के बाद प्लास्टिक, मेटल, वायर सहित अन्य उपकरण अलग करते हैं। अनुपयोगी वस्तुओं को अलग फेंक देते हैं। इसमें हैवी मेटल, मर्करी, लेड, कैडमियम, क्रोमियम, आर्सेनिक, एंटीमनी, निकल, बेरेलियम सहित अन्य तत्व शामिल होते हैं। ये हैवी मेटल पर्यावरण व स्वास्थ्य के लिए घातक हैं। कई खतरनाक केमिकल भी होते हैं, जिन्हें खाली जमीन पर डालने से भूमिगत जल व मृदा को भी नुकसान पहुंचता है।
शहर में ई-वेस्ट कलेक्शन सेंटर बनाने व ई-वेस्ट रिसाइक्लिंग प्लांट स्थापित करने के लिए डेढ़ दशक से बात हो रही हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व जिला प्रशासन की बैठकों में अक्सर ये मुद्दा उठता है। लेकिन, जमीनी स्तर पर अब तक कोई काम शुरू नहीं हो सका है। जबकि, इंदौर में 2018 से ई वेस्ट के कलेक्शन सेंटर बन गए थे। 2021 में ई वेस्ट रिसाइक्लर प्लांट भी स्थापित हो गए। भोपाल में भी ई-वेस्ट क्लीनिक स्थापित हो चुका है।
e waste : शहर में ई-वेस्ट के कलेक्शन सेंटर बननाने व रिसाइक्लर प्लांट स्थापित करने के लिए जिला प्रशासन व नगर निगम के साथ मिलकर प्रयास कर रहे हैं।
Updated on:
23 Aug 2025 06:07 pm
Published on:
23 Aug 2025 06:03 pm

बड़ी खबरें
View Allजबलपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
