
earthquake in jabalpur today encroachment huge number
जबलपुर। भूकंप के लिहाज से संवेदनशील जबलपुर की पहाडिय़ों पर अतिक्रमण कर कई मंजिला मकान तान दिए गए हैं। शहर का ऑक्सीजन जोन रही पहाडिय़ों में ग्रीन बेल्ट का दायरा लगातार सिमट रहा है। पिछले तीन साल में पहाडिय़ों से चट्टान लुढकने की कई घटना हो चुकी हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर मदनमहल पहाड़ी को अतिक्रमण मुक्त कराने की जा रही कार्रवाई से शहरवासियों में आस जग गई है कि सिद्धबाबा, कं चनपुर, मदार छल्ला, मक्का नगर, भानतलैया की पहाडिय़ों को भी कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई की जाएगी।
news facts-
भूकंप के लिए संवेदनशील पहाडिय़ों पर अतिक्रमण से लोगों की जान को खतरा
सिद्धबाबा, टनटनिया पहाड़ी से मक्का नगर तक तन गए अवैध मकान-दुकान
सिद्धबाबा पहाड़ी सिंधी कैम्प-
सिंधी कैम्प लालमाटी क्षेत्र में स्थित इस पहाड़ी के एक हिस्से को नील गिरी पहाड़ी के नाम से भी जाना जाता है। जिसमें स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर महर्षि महेश योगी की तपोस्थलि है, जहां उन्होंने सिद्धि हासिल की थी। पहाड़ी पर कब्जों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
कं चनपुर से शोभापुर पहाड़ी-
ये खूबसूरत पहाड़ी पूरी तरह से अतिक्रमण की चपेट में है। हरे-भरे पेड़ पहाड़ी से लगातार काटे जा रहे हैं। शहर की बड़ी पहाडिय़ों में शामिल इस पहाड़ी का क्षेत्र कं चनपुर से शोभापुर के बीच है।
मदारछल्ला पहाड़ी-
मदारछल्ला पहाड़ी में कच्चे-पक्के अवैध निर्माणों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले एक दशक में इस पहाड़ी पर हजारों की संख्या में नए कब्जे हो गए। लोग ऊ बडख़ाबड़ चट्टानों पर मनमाने तरीके से निर्माण कर यहां रह रहे हैं।
मक्का नगर के पीछे-
अधारताल के मक्का नगर क्षेत्र में पहाड़ी की विशालकाय चट्टानों को लगातार धराशायी किया जा रहा है। पहाड़ी की जमीन पर कब्जा कर कई मोहल्ले बस गए हैं। इस पहाड़ी पर अतिक्रमण लगातार बढ़ रहे हैं। इस क्षेत्र में अवैध तरीके से कालोनी भी विकसित की जा रही हैं।
भानतलैया क्षेत्र- घमापुर भानतलैया क्षेत्र की पहाड़ी पूरी तरह से अतिक्रमण की चपेट में है। पहाड़ी पर अभी भी लगातार कब्जे हो रहे हैं। चट्टानों को धराशायी किया जा रहा है। इस पहाड़ी पर हरियाली मिट रही है।
हाईकोर्ट के आदेश पर मदनमहल पहाड़ी को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद अन्य पहाडिय़ों पर से भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
- छवि भारद्वाज, कलेक्टर
भूकं प के लिहाज से संवेदनशील जबलपुर में भवनों का निर्माण भूकं प रोधी तकनीक से होना चाहिए, लेकिन पहाडिय़ों पर बने भवनों में बीम, कॉलम भी नहीं हैं। भवन का स्ट्रक्चर बनाते वक्त चट्टानों को तोड़ा जाता है, इसके कारण पहाडिय़ों पर से भू स्खलन का खतरा बढ़ जाता है।
- विकास दुबे, स्ट्रक्चर इंजीनियर
Published on:
03 Oct 2018 09:36 am
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