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प्रबोधिनी एकादशी: शयन से जागे देव, लेकिन सात फेरों पर है ये बंदिश, देखें वीडियो

जगह-जगह धूमधाम से हुआ तुलसी व शालिगराम का विवाह

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जगह-जगह धूमधाम से हुआ तुलसी व शालिगराम का विवाह

जबलपुर। प्रबोधिनी एकादशी को पालनहार भगवान विष्णु शेष शैया से जाग गए हैं। इस खुशी में गोपियां झूमकर नाचीं। घर-घर में गन्ने के मंडप सजे और तुलसी-शालिगराम के विवाह की रस्म निभाई गई। दिन भर पूजन का दौर चलता रहा। तंत्र साधना के जानकारों ने मंत्रों का जागरण किया। सबसे अहम बात यह है कि इस बार स्वयं सिद्धा एकादशी पर भी विवाह मुहूर्त नहीं रहा। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि आमतौर पर देवउठनी के साथ ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है, लेकिन सूर्य अस्त चल हो रहा है। इसलिए देवउठनी ग्यारस सहित वर्ष के अंत तक विवाह के मुहूर्त नहीं हैं। दिसंबर में चार मुहूर्त बताए जा रहे हैं, लेकिन ज्योतिर्विद उसे प्रमाणिक नहीं मान रहे। नए साल में विवाह मुहूर्तों की भरमार है। नए वर्ष में 107 दिन शादी की शहनाई गूंजेगी।

निकली शालिगराम की बारात
शहर में देवउठनी ग्यारस को लेकर रविवार को दिन भर तैयारियां चलीं। पूजन सामग्री के साथ ही गन्ने की खूब बिक्री हुई, इसे छोटी दिवाली के रुप में भी मनाया जाता है। घरों में रंग-बिरंगी रोशनी के इंतजाम किए गए। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु चार माह क्षीर सागर में विश्राम करते हंै। सृष्टि का संचालन का दायित्व भगवान शिव निभाते हैंं। देवउठनी एकादशी पर शहर के प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजन अनुष्ठान के साथ ही तुलसी-सालिगराम का विवाह की रस्म निभाई गई। कई जगह शालिगरामजी की बारात धूम धाम से निकाली गई। कन्यादान और सात फेरों की रस्म के साथ उनका तुलसी माता से विवाह कराया गया। ज्योतिषाचार्योंं के अनुसार भगवान विष्णु ही विधि के विधाता हैं। इसलिए उनके विवाह में मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती। एकादशी पर उनके विवाह को लेकर कई जगह उत्सव जैसा नजारा रहा।

झूमकर नाचीं गोपियां
देवोत्थानी एकादशी पर हनुमानताल व बधैयापुरा स्थित मंगल चंडी माता मंदिर के साथ त्रिमूर्ति नगर स्थित दुर्गा मंदिर में भी भव्य नजारा रहा। एक माह तक कार्तिक व्रत रखने वाली गोपियों यानी महिलाओं ने यहां मंगलगीत गाते हुए भगवान नारायण को शैया से जगाया और उन्हें विविध प्रकार के नैवेद्य और व्यंजन अर्पित किए। आमंत्रण पर गोपियों ने घर-घर जाकर तुलसी-शालिगराम विवाह की रस्म निभाई और नृत्य-गीत आदि की प्रस्तुति दी। गोपियों में सुमन शर्मा, गीता तिवारी, ऊषा मिश्रा, खुशबू गुप्ता, गायत्री तिवारी, उमा सोनी, ज्योति सराफ, अंजु चौबे समेत अन्य महिलाएं शामिल रहीं।

15 जनवरी से मुहूर्त शुरू
ज्योतिर्विद जर्नादन शुक्ल के अनुसार इस वर्ष जुलाई माह में कुछ मुहूर्त में विवाह हुए थे। उसके बाद से देवउठनी एकादशी सहित साल के अंत तक मांगलिक कार्य के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त नहीं है। इसका कारण 12 नवंबर को गुरु ग्रह का अस्त होना है, जो 7 दिसंबर तक अस्त रहेगा। 16 दिसंबर से 14 जनवरी तक सूर्य के धनु राशि में रहने पर खरमास रहेगा। इस कारण से विवाह नहीं होंगे। मकर संक्रांति के अगले दिन से मुहूर्त शुरू हो जाएंगे।

वर्ष 2019 में विवाह मुहूर्त
17, 18, 22 से 31 जनवरी। 1 से 5, 7 से 13, 15, 19 से 28 फरवरी, 2, 3, 7, 9, 12 से 14 अप्रैल, 15 से 18, 19 से 26 अप्रैल, 1 से 8, 12 से 15, 17 से 21, 23, 28 से 30 मई, 4, 8, 9 से 20, 24 से 26 जून, 5 से 11 जुलाई, 2, 8, 19 से 24, 26, 30 नवंबर और 5 से 7, 11 और 12 दिसंबर।