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जबलपुर। शहर के ऐतिहासिक तालाबों में अनदेखी के चलते अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर लिया है। कहीं घर बना लिए गए हैं तो कहीं गार्डन आदि बनाकर इन तालाबों को मिटाने का प्रयास दशकों से चल रहा है। अतिक्रमण विरोधी दस्ते और नगर निगम द्वारा अनदेखी करना इन तालाबों के अस्तित्व को खत्म कर रही है। हालांकि कुछ तालाबों को बचाने की कवायद फिर से शुरू हो गई है। इनमें गढ़ा का ऐतिहासिक इमरती तालाब भी शामिल है। जहां मंगलवार को कब्जेधारियों के कच्चे पक्के निर्माणों को नगर निगम के बुल्डोजर ने ध्वस्त कर तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराया है।
जानकारी के अनुसार गढ़ा स्थित इमरती तालाब के किनारे अवैध तरीके से बनाए गए पक्के निर्माण कार्यों पर मंगलवार को नगर निगम का बुलडोजर चला। नगर निगम की विशेष टीमों ने तालाब के आसपास जमे 12 से अधिक अवैध कब्जों और अतिक्रमणों को हटाया। इस दौरान कुछ लोगों ने कार्रवाई का विरोध भी किया। अधिकारियों ने उन्हें समझाइश दी। निगमायुक्त आशीष वशिष्ठ ने बताया कि तालाबों के संरक्षण के लिए नगर निगम प्रशासन विशेष पहल की जा रही है। जल्द ही शहर के अन्य तालाबों का सौंदर्यीकरण व उन्नयन कार्य शुरू होगा। इन्हें आमोद-प्रमोद के स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इमरती तालाब शहर का ऐतिहासिक व प्राचीन तालाब है। इसकों विकसित करेंगे।
रानीताल सडक़ का डामरीकरण शुरू
रानीताल-यादव कॉलोनी सडक़ का मंगलवार को डामरीकरण किया गया। रानीताल चौराहा से चेतराम मढिय़ा के बीच यह सडक़ चलने लायक नहीं बची थी। सडक़ पर गिट्टियां वाहनों के गुजरने पर उचटकर राहगीरों को बुलेट की तरह लग रही थीं। इस मुद्दे को ‘पत्रिका’ ने प्रमुखता से उठाया था। तब प्रशासन हरकत में आया।
Published on:
02 Mar 2022 03:59 pm
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