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शारदा माता का आया सपना, ड्राइवर ने नौकरी छोड़ PF का पैसों से बनाया मंदिर – देखें वीडियो

शारदा माता का आया सपना, ड्राइवर ने नौकरी छोड़ PF का पैसों से बनाया मंदिर - देखें वीडियो

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Famous Barela Mandir Jabalpur

Famous Barela Mandir Jabalpur

जबलपुर। संस्कारधानी के देवी दरबारों की बात हो और बरेला की पहाड़ी पर विराजमान मां शारदा की बात न हो ये हो ही नहीं सकता है। माता शारदा का मनमोहक रूप देखकर भक्त निहाल हो जाता है। हरी भरी वादियों के बीच विराजमान माता के दर्शनों को भारी भीड़ उमड़ रही है। इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना तो नहीं है, लेकिन एक भक्त की भक्ति का जीवंत प्रमाण है। जिसने स्वप्न में आई देवी के प्रति विश्वास जगाया और उनका भव्य मंदिर बनवा दिया।

शारदा मंदिर बरेला: ड्राइवर ने राज्य परिवहन की नौकरी छोड़ी, मिले पैसों से बनाया माता का मंदिर
मंदिर बनाने वाले श्रवण शुक्ला को दिया था माता ने स्वप्न

ड्राइवर ने छोड़ी नौकरी, मिले पैसों से बनवाया मंदिर
शारदा देवी मंदिर, बरेला के पुजारी आशीष शुक्ला ने बताया कि इस पहाड़ी पर एक मढिय़ा थी, जिसमें माता की प्रतिमा स्थापित थी। मेरे पिता स्व. श्रवण कुमार शुक्ला राज्य परिवहन में ड्राइवर थे, जो कि जबलपुर से मंडला रोड पर बस चलाते थे। उनका रोज यहां से गुजरना होता था, माता को प्रणाम करके ही आगे बस जाती थी। एक बार माता उनके स्वप्न में आईं तो वे पहली बार पहाड़ी पर उनके दर्शन को आए। जहां माता मढिय़ा के अंदर लेटी हुई मुद्रा में थीं। दोबारा जब स्वप्न आया तो उन्होंने मंदिर बनाने का प्रण किया, लेकिन पैसे नहीं थे। ऐसे में उन्होंने राज्य परिवहन की नौकरी छोड़ दी और जो 70 हजार रुपए मिले उससे ये भव्य मंदिर बनवाया। मंदिर का निर्माण 15 जून 1975 को हुआ था।

मंगलमय यात्रा के लिए रुकते हैं यात्री
स्थानीय लोगों व राहगीरों ने बताया चूंकि मंडला की ओर जाने वाला मार्ग दोनों तरफ गहरी घाटियों से घिरी हैं, आए दिन वाहन दुर्घटना का शिकार होते थे। फिर माता से लोगों ने प्रार्थना की तो दुर्घटनाएं कम हो गईं। तबसे यहां से गुजरने वाला हर वाहन नीचे एक मिनट के लिए रुकता जरूर है। माता की कृपा से कई सालों से घाटी में वाहन नहीं गिरे हैं। 1994 में श्रवण शुक्ला का स्वर्गवास हो गया, तबसे उनके पुत्र आशीष शुक्ला मंदिर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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