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प्रदेश के इस शहर में ‘फिल्म सिटी’ लेगी आकार, कलाकारों की बनाई जाएगी प्रोफाइल

- 25 करोड़ तक के बजट की फिल्म की हो रही है शूटिंग - 250 दिन के लगभग फिल्मों की शूटिंग- 14 फिल्म की शूटिंग 29 महीनों में- 12 फिल्मों की 2020-21 में हुई शूटिंग - छोटे-मझोले बजट की फिल्मों की शहर और आसपास शूटिंग बढ़ी

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जबलपुर. बदले माहौल में कई बार फिल्म कलाकारों के लिए वैनिटी वैन दूसरे शहरों से मंगाना पड़ रही है। इतना ही नहीं अच्छी गुणवत्ता के ड्रोन कैमरे न होने के कारण फिल्म सिटी हैदराबाद या मुंबई से बुलवाने पड़ रहे हैं। इन कमियों को दूर करने के लिए कलाकार व विशेषज्ञों की प्रोफाइल तैयार करने में प्रशासन की जबलपुर फिल्म सेल जुट गई है। उद्योग जगत के लोगों से सम्पर्क साधा जा रहा है।

धुआंधार से लेकर बरगी की वादी, नर्मदा तटों में फिल्मों की शूटिंग की संख्या बढ़ रही है। छोटे और मंझौले बजट की फिल्म यहां शूट हो रही हैं। ऐसे में कलाकारों से लेकर संसाधनों की भी आवश्यकता पड़ रही है। कलाकार व विशेषज्ञों की प्रोफाइल तैयार करने में प्रशासन की जबलपुर फिल्म सेल जुट गई है। उद्योग जगत के लोगों से सम्पर्क साधा जा रहा है।

इन बैनरों के बजट की फिल्म की शूटिंग
फोकस टेक्नोलॉजी मुम्बई, आइडियल फिल्म मेकर हैदराबाद, एमपी 20 पिक्चर जबलपुर, एबीएस राज फिल्मस, एवीपी आर्ट एंड फिल्मस, केपी प्रोडक्शन रीफ्यूल समूह, इलीक्सिर प्रोडक्शन पुणे, वीएसपी प्रोडक्शन, आनंदी आरर्ट क्रिएशन, निओन फिल्मस, पिक्चर प्रोडक्शन, एसजी प्रोडक्शन।

पोस्ट प्रोडक्शन में भी आती है समस्या
फिल्म की शूटिंग पूरी हो जाने के बाद फिल्म निर्माता को प्रोस्ट प्रोडक्शन के लिए स्टूडियो जाना पड़ता है, जहां मिक्सिंग, एडिटिंग हो सके। पोस्ट प्रोडक्शन के लिए मुम्बई जाना पड़ता है। पोस्ट प्रोडक्शन दो से ढाई महीने का रहता है, लेकिन स्टूडियो के स्तर पर होने वाली देर के कारण फिल्म रिलीज होने में देर भी होती है और फिल्म निर्माता का बजट भी बढ़ जाता है।

जबलपुर व आसपास शूट हुईं फिल्म
नेशनल जियोग्राफिक, नारकासुर, गुबार फिल्म, द आउट साइड सोल्जर्स, दुविधा वेबसीरीज, अक्कड़ बक्कड़ बम्बे बो वेबसीरीज, भागमभाग वेबसीरीज, द रिटर्न ऑफ विजय वेबसीरीज, अहिंसा फीचर फिल्म, गौंड जनजाति की वीरांगना रानी दुर्गावती, साले आशिकी, नर्मदाष्टकम।

जबलपुर टूरिज्म प्रमोशन काउंसिल सीईओ, हेमंत सिंह ने कहा जबलपुर में बड़े बैनर से लेकर वेबसीरीज की फिल्मों की शूटिंग हो रही है। फिल्म निर्माताओं को यहां आसानी से कलाकार व संसाधन सुलभ हो सकें, इसके लिए उद्योग जगत के लोगों से लगातार सम्पर्क किया जा रहा है। कलाकारों से लेकर हर विधा के विशेषज्ञों की प्रोफाइल तैयार की जाएगी, ताकि यहां फिल्म उद्योग आकार ले सके।

फिल्म निर्माता वीरेंद्र सिंह पवार ने कहा कि फिल्म शूटिंग के दौरान कई बार वैनिटी वैन, अच्छी गुणवत्ता के ड्रोन जैसे संसाधनों की कमी के कारण समस्या आती है। इतना ही नहीं पोस्ट प्रोडक्शन के लिए स्थानीय स्तर पर स्टूडियो नहीं होने के कारण मुंबई जाना पड़ता है, जहां मिक्सिंग, एडिटिंग में ज्यादा समय लग जाता है। इससे फिल्म की लागत तो बढ़ती ही है, फिल्म रिलीज होने में भी ज्यादा समय लगता है।

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