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सिर्फ यहां तैयार होती है भीष्म टैंक की गन

जीसीएफ में बढेग़ा काम, ओएफबी को मिला है इंडेंट, मेक इन इंडिया के तहत होगा उत्पादन    

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T-90 TANK

Jabalpur. The gun carriage factory (GCF) will also benefit from the indenture of the T-90mm tank from the Army to the Ordnance Factory Board. T

जबलपुर@ ज्ञानी रजक. सेना से आयुध निर्माणी बोर्ड को मिले टी-90 एमएम टैंक के इंडेंट का फायदा गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) को भी होगा। भीष्म नाम से प्रसिद्ध इस टैंक का गन आर्टिकल और कुछ पाट्र्स जीसीएफ में तैयार किए जाते हैं। अब यहां टैंक की गन की असेम्बलिंग भी होगी। वर्तमान में जीसीएफ में 70-80 गन आर्टिकल का उत्पादन हर साल होता है। अब इसमें और इजाफा होगा।

सेना का मुख्य युद्ध टैँक
125 एमएम स्मूथ बोर गन वाला टी-90 एमएस टैंक सेना का मुख्य युद्ध टैंक है। आधुनिक तकनीक से बने इस टैंक से पांच किमी दूर तक गोला दागा जा सकता है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव को देखते हुए सेना ने आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) को बड़ा ऑर्डर (इंडेंट) दिया है। इसके तहत हर साल 120 युद्धक टैंक बनाए जाएंगे। टैंक बनाने का जिम्मा हैवी वाहन निर्माणी अवाडी को मिला है।

IMAGE CREDIT: PATRIKA

ये है खासियत
- 125 एमएम की स्मूथ बोर गन लगी है टैंक में

- 7.62 एमएम की मशीन गन का होता है उपयोग
- 46.5 टन है टैंक का वजन

- 01 हजार एचपी का है इंजन
- ऑटोमैटिक फायर प्रोटेक्शन सिस्टम से लैस है टैंक

- रात में भी दुश्मन के ठिकानों को उड़ाने में है सक्षम

बैरल का आधार है गन आर्टिकल

गन आर्टिकल टी-90 टैंक का आधार होता है। इसी पर बैरल माउंट की जाती है। यह उसके मूवमेंट भी भूमिका निभाता है। टैंक का क्रेडल जीसीएफ में ही होता है। रिक्वाइल सिस्टम का काम देशभर में केवल जीसीएफ में होता है। बैरल की सप्लाई कानपुर आयुध निर्माणी से होती है। टैंक में दो गन होती है। एक मेन गन और दूसरी मशीन गन। मेन गन का उपयेाग लम्बी दूरी पर गोला बरसाने और मशीन गन का उपयोग टैंक के पास आ चुके दुश्मन को मारने में किया जाता है।

ओएफबी को टी-90 टैंक का इंडेंट मिला है। इसका फायदा वर्कलोड के रूप में जीसीएफ को भी होगा। टैंक का महत्वपूर्ण भाग गन आर्टिकल यहीं तैयार होता है। बोर्ड से अभी वर्कलोड सम्बंधी जानकारी नहीं आई है।

संजय श्रीवास्तव, जनसम्पर्क अधिकारी, जीसीएफ

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