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SFRI : औषधीय पौधों के संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य वन अनुसंधान संस्थान ने पहल की है। संस्थान औषधीय पौधों का जीन बैंक तैयार कर रहा है। इसके तहत विलुप्त होती प्रजातियों को संरक्षित करने में मदद मिलेगी तो वहीं आधुनिक तकनीकों के उपयोग के माध्यम से पौधों को तैयार भी किया जाएगा। राज्य वन अनुसंधान संस्थान में इस दिशा में काम कर रहा है। करीब तीन हजार वर्गफीट क्षेत्र में जीन बैंक के माध्यम से पौधों का संरक्षण किया जएगा।
इस जीन बैंक के माध्यम से करीब 600 पौधों को संरक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें बच, अग्निमंथा, रुद्राक्ष, सीता अशोक, गरुडफ़ल, रोहन, सतावर, ग्वारपाठा, अश्वगंधा, सर्पगंधा, श्योनाक, अग्निमंथा, रुद्राक्ष, सीता अशोक, गरुडफ़ल, रोहन, सतावर, ग्वारपाठा जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियों को संरक्षित किया गया है। अन्य प्रजातियों को भी संग्रहित करने काम जारी है।
जीन बैंक में हर पौधे की जानकारी होगी जिसमें उसका वैज्ञानिक नाम के साथ ही उसकी उपयोगिता और उसके महत्व के बारे में बताया जाएगा। इससे आयुर्वेद, फार्मेसी, फॉरेस्ट्री और बॉटनी के छात्रों को फायदा मिलेगा। छात्रों को संरक्षण के महत्व की समझ विकसित होगी और वे पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकेंगे।
जंगलों की घटती संख्या और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के कारण औषधीय पौधों को भी नुकसान हो रहा है तो वहीं इनका क्षेत्र भी तेजी से घटता जा रहा है। इसे देखते हुए यह कदम उठाया गया है। अब तक करीब 200 प्रजातियों का संग्रहण किया जा चुका है।
Published on:
06 Feb 2025 11:58 am
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